प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक राजा लोने सिंह की कर्मस्थली पर गुरुवार को मेला लगेगा। यहां होने वाली गोष्ठी में स्वतंत्रता संग्राम में राजा लोने सिंह के योगदान, उनके साहस, शौर्य और भारतीय संस्कृति की रक्षा में उनके योगदान की चर्चा की जाएगी। यह संगोष्ठी समाजसेवी, पर्यावरणविद और शिक्षक केके मिश्र की पहल पर शिक्षकों के सौजन्य से हो रहा है।
कार्यक्रम संयोजक कृष्ण कुमार मिश्र ने बताया कि यह संगोष्ठी राजा लोने सिंह की ध्वस्त गढ़ी पर होगी। इसमें क्षेत्र के शिक्षकों और प्रशिक्षु शिक्षकों के अलावा जिले भर से लोगों को बुलाया गया है। गोष्ठी में वक्ताओं के रूप में जिले के इतिहासविद् और स्वतंत्रता संग्राम में खीरी जिले के योगदान पर शोध करने वाले लोग मौजूद रहेंगे।
उन्होंने बताया कि बच्चों को इस महान ऐतिहासिक स्थल का शैक्षणिक भ्रमण कराकर राजा लोने सिंह के बारे में जानकारी दी जाएगी। केके मिश्र ने बताया कि तराई क्षेत्र में राजा लोने सिंह ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया। अंग्रेजों से लोहा लेते हुए उन्होंने एक बार तो जिले को आजाद ही करा दिया था। बाद में अंग्रेजों ने बड़ी तैयारी के साथ उनपर हमला किया, जिसमे राजा लोने सिंह को पराजय का मुंह देखना पड़ा।
केके मिश्र ने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि पुरातत्व विभाग ने मितौली की ध्वस्त गढ़ी का अभी तक अध्ययन नहीं किया है। गोष्ठी के माध्यम से राजा लोने सिंह की कर्मस्थली को पर्यटनस्थल घोषित करने की मांग की है।