लखीमपुर खीरी। विद्युत निगम को हस्तांतरित होने के डेढ़ माह बाद ही न्यू छाउछ उपकेंद्र में 33 केवी ब्रेकर का चबूतरा धंस गया है। इतने कम समय में चबूतरा धंसने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। विभागीय अफसरों ने आनन-फानन काम शुरू करा दिया है, ताकि निर्माण कार्य में हुआ खेल पूरी तरह से उजागर न हो सके।
लखीमपुर डिवीजन के पांच उपकेंद्रों में सबसे ज्यादा लोड छाउछ उपकेंद्र पर है। भार अधिक होने से सबसे ज्यादा फाॅल्ट भी यहीं होते थे। इससे राहत दिलाने के लिए 5.50 करोड़ की लागत से 10 एमवीए की क्षमता वाला न्यू छाउछ उपकेंद्र बनाया गया, जो डेढ़ माह पहले कार्यदायी संस्था ने विभाग को हैंडओवर किया है। इससे तीन फीडर जुड़े हैं। इसके बाद ही निर्माण में खामियां नजर आने लगीं। 33 केवी ब्रेकर का चबूतरा धंसने से निर्माण पर सवाल उठे गए। उपकेंद्र का निर्माण सेकंडरी वर्क ने कराया है।
तालाब की जमीन पर बनवाया गया है
जिस जगह पर न्यू छाउछ उपकेंद्र बना है, वहां पर पूर्व में तालाब था। वहीं पर श्मशान घाट भी था। तालाब को पटाकर यह उपकेंद्र बनाया गया है। उपकेंद्र जाने के लिए कोई रास्ता भी नहीं है। उपकेंद्र पर तीन शिफ्टों में मात्र एक-एक कर्मचारी ड्यूटी पर रहता है। सुनसान जगह पर इस उपकेंद्र पर ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को काफी दिक्कतें होती हैं।
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जगह-जगह मिले थे ज्वाइंट, नहीं हुई कार्रवाई
हस्तांतरण से पहले ही एसडीओ ने उप केंद्र की जांच की तो अंडरग्राउंड 33 केवी बिजली लाइन में जगह-जगह ज्वाइंट होना पाया गया, जबकि नियमानुसार ज्वाइंट नहीं होने चाहिए। लाइन के अलावा अन्य कई खामियां भी सामने आईं। एसडीओ ने इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी है, लेकिन बाद में अफसर इसको हजम कर गए। इस मामले में आज तक कुछ भी नहीं हो सका।
क्या बोले जिम्मेदार
इस मामले में जब सेकेंडरी वर्क एई अनुराग श्रीवास्तव से बात की तो उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी लगी है। इसको दिखवाया जा रहा है। सिविल इंजीनियर इसको देख रहे हैं। सिविल इंजीनियर इसरार अहमद से बात की तो उन्होंने कहा कि फाउंडेशन हल्का धंसा है, जो ठीक कराया जा रहा है। ठीक कराने में करीब 15 दिन लग जाएंगे।