खीरी टाउन। मोहर्रम का चांद दिखते ही कस्बा खीरी में मातम मजलिस का सिलसिला शुरू हो गया है। इस दौरान कस्बे में जगह-जगह इमाम हुसैन की याद में लोग शरबत और पानी की सबील लगाकर पिला रहे हैं, वहीं शिया इमामबाड़े में मजलिस का आयोजन भी शुरू हो गया।
मोहर्रम के चांद के बाद लोग इमाम हुसैन की कर्बला में अजीम कुर्बानी को याद कर गम मनाते हैं। वहीं, शिया समुदाय काले कपड़े पहन कर गम का इजहार कर रहे हैं। घरों पर काले झंडे लगाते हैं।
मोहर्रम के चलते मंगलवार को पांचवीं का पहला जुलूस का आयोजन किया गया, जुलूस शेख सराएं से निकल कर अपने निर्धारित रास्तों से होता हुआ देर शाम को सुन्नी इमामबाड़े में संपन्न हुआ। मोहल्ला मुगली टोला में स्थित शिया वक्फ इमामबाड़ा में अंजुमन हुसैनिया और अंजुमन गुलामाने हुसैन के द्वारा मजलिस का सिलसिला शुरू हो गया।
मौलाना जीशान हैदर सिमरापुरी और लखनऊ से आए मौलाना नज़र अब्बास जैदी मजलिस को खिताब करते हुए इमाम हुसैन के किरदार पर रोशनी डाली और बताया कि इमाम हुसैन की जंग कर्बला में इस्लाम को बचाने के लिए असत्य पर सत्य की जंग यजीद के साथ हुई। इस दौरान हुसैन ने अपना सर को कलम करवा कर बता दिए कि हुसैन की शहादत के बाद हर घर में हुसैन का नाम लिया जाता है।
मोहम्मदी में भी शिया समुदाय का पांचवीं मोहर्रम अलम का जुलूस बाजार खुर्द इमामबाड़े से बड़े अकीदत के साथ उठा, जिसमें बड़ी तादाद में अकीदतमंदों ने शिरकत की। जुलूस से पहले मौलाना मुराद अली जैदी ने कहा कि हुसैन ने जिस तरह से करबला के मैदान में अपनी कुर्बानी पेश की उसकी मिसाल आज तक दुनिया में नहीं मिलती। जुलूस में अब्बास नकवी, आलिम रजा, हसन नकवी, रानू रिजवी, आजाद रिजवी, अफजल जैदी, शारुख रिजवी, बच्छन जैदी, रूमी रजा, इबबन जैदी, रिजवान जैदी, अकरम रिजवी सहित तमाम मातमदार मौजूद रहे।