लखनऊ/लखीमपुर खीरी। प्रदेश सरकार बाघ-तेंदुओं के हमले में मौत पर मिलने वाली सहायता राशि पांच लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की तैयारी कर रही है। वन विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। साथ ही हमलों की घटनाएं कम करने के लिए कतर्निया के जंगल से सटे गांवों में 1500 सोलर एलईडी लाइट लगाने पर सहमति बनी है।
प्रदेश में दुधवा, कतर्निया, पीलीभीत, बिजनौर और मुरादाबाद के जंगल से सटे क्षेत्रों में वन्यजीवों के हमले बढ़ रहे हैं। लखीमपुर खीरी के ईसानगर क्षेत्र के ग्राम रायपुर के मजरा लाजजीपुरवा में रविवार शाम छह वर्षीय शिवम को तेंदुए ने मार डाला था।
वन विभाग के अनुसार बाघ और तेंदुओं के अधिकतर हमले शाम छह से नौ बजे के बीच होते हैं। ऐसे में रोशनी की बेहतर व्यवस्था से घटनाएं कम हो सकती हैं। प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी के प्रयासों से एक कंपनी यह सोलर लाइट लगाएगी।
वर्तमान में बाघ, शेर, तेंदुआ, भेड़िया, लकड़बग्घा, मगरमच्छ, हाथी, गैंडा और जंगली सुअर के हमले में मौत पर पांच लाख रुपये सहायता मिलती है। महाराष्ट्र में यह राशि 25 लाख रुपये है। इसी को देखते हुए यूपी में इसे 10 लाख रुपये करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
दो साल में 18 मौतें
लखीमपुर खीरी में पिछले दो वर्षों में बाघ और तेंदुओं के हमले में 18 लोगों की मौत हुई। बाघ के हमले में पांच लोगों की मौत और 17 लोग घायल हुए, जबकि तेंदुओं के हमले में 13 लोगों की जान गई और 70 लोग घायल हुए।
41 पीड़ितों को मिला मुआवजा
पिछले दो वर्षों में बाघ, तेंदुओं व अन्य वन्यजीवों के हमलों के 41 पीड़ितों को मुआवजा दिया गया। इनमें 23 मृतकों के परिजन और 18 घायल शामिल हैं।