लखीमपुर खीरी। राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के मौके पर जहां सुरक्षित प्रसव और मातृ स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने की बात होती है, वहीं जमीनी स्तर पर गर्भवती महिलाओं में एनीमिया एक गंभीर चुनौती बनकर उभर रही है। नियमित जांच के दौरान कई महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) पाई जा रही है, जो मां और बच्चे दोनों के लिए खतरा बन सकती है।
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाली गर्भवती महिलाओं में प्रतिदिन करीब 20-30 महिलाओं में एनीमिया की कमी सामने आ रही है। वहीं पैथोलॉजी में होने वाली जांचों में भी करीब दो प्रतिशत एनिमिक महिलाएं सामने आ रही है। बीते माह की बात करें तो जिला महिला अस्पताल की पैथोलॉजी में 77 महिलाओं में खून की कमी पाई गई।
जिला महिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजलि वर्मा ने बताया कि ओपीडी में करीब 20 महिलाएं एनीमिया की कमी की सामने आती है। उन्हें दवाओं के साथ उचित खान-पान की सलाह दी जाती है। उन्होंने बताया कि एनीमिया की वजह से जच्चा के साथ ही बच्चे की आंतरिक वृद्धि पर असर पड़ता है। गर्भवती महिलाओं को तीन माह तक फोलिग एसिड की टेबलेट दी जाती है। वहीं चार माह पर एलबेंडाजोल की टेबलेट दी जाती है।
इसके अलावा आयरन व कैल्शियम की टेबलेट गर्भवती महिलाओं को दी जाती है। प्रसव के बाद भी करीब डेढ़ माह तक आयरन व कैल्शियम की दवा प्रसूताओं को खिलाई जाती है।
डॉ. अंजलि वर्मा ने बताया की गर्भवती महिलाओं को हरी सब्जियां, फल, दाल, दूध और आयरन युक्त आहार नियमित रूप से लेना चाहिए। इसके साथ समय-समय पर जांच करानी चाहिए। वहीं चिकित्सकों के बताई गई दवाओं को नियमित रूप से लेनी चाहिए।