जिले में एक फरवरी से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही शासन की मंशा पर पानी फेर रही है। मंगलवार की सुबह जिला महिला अस्पताल में प्रसव कराने आई एक गर्भवती महिला की मौत हो गई। हालांकि परिवार वालों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे दो दिन पूर्व 22 फरवरी को भी जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कराए गए दो मासूमों की मौत हो चुकी है।
गोला क्षेत्र के गांव बहारगंज निवासी शांति देवी (32) पत्नी गोकरन प्रसाद को मंगलवार की सुबह करीब 10 बजे सरकारी एंबुलेंस से जिला महिला अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत देखते हुए भर्ती कर लिया, लेकिन जब तक इलाज शुरू होता उससे पहले ही गर्भवती महिला ने दम तोड़ दिया। गर्भवती महिला के साथ आई आशा मीना देवी ने बताया कि महिला के पहले से चार बच्चे थे, यह उसका पांचवां प्रसव होना था। डॉक्टरों का कहना है कि गर्भवती महिला एनीमिया की शिकार थी, जिसे समय रहते इलाज की जरूरत थी। इलाज में देरी होने पर महिला एवं उसके बच्चे को नहीं बचाया जा सका। डॉक्टर का कथन शासन के दावों और मंशा की पोल खोल रहा है, क्योंकि आशा और एएनएम को गर्भवती महिलाओं का समय-समय पर चेकअप एवं टीकाकरण का दायित्व सौंपा गया है।
उधर, जिला अस्पताल (पुरुष) के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती दो मासूमों की मौत पहले हो गई थी। सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव सिगनिया निवासी मोहन के एक वर्षीय पुत्र धर्मराज को 19 फरवरी को तबियत खराब होने पर भर्ती कराया गया था। कई दिनों तक चले इलाज के बाद 22 फरवरी की सुबह उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक बच्चा डायरिया से पीड़ित था। इसी तरह बनवारीपुर निवासी साबिर अली के पुत्र सादिक (12) की इलाज के दौरान 22 फरवरी की रात में मौत हो गई। वह हाइपरग्लासिमिया समेत अन्य बीमारियों से ग्रस्त था।
सीएमएस, जिला महिला अस्पताल डॉ. मीरा वर्मा ने बताया कि अत्यधिक एनीमिया के कारण गर्र्भवती महिला की हार्टअटैक से मौत हुई हैै। उसका पहले कोई चेकअप नहीं कराया गया था। इस कारण उसकी हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी। उसके इलाज के लिए ग्लूकोस की बोतल लगाई जा रही थी लेकिन तब तक उसने दम तोड़ दिया।