गांवों में गंदगी और दफ्तर में लगा शिकायतों का अंबार
1707 सफाईकर्मियों की है राजस्व गांवों में तैनाती
गांवों में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। राजस्व गांवों में तैनात सफाई कर्मचारी गांवों में नजर नहीं आ रहे हैं। ग्राम स्वच्छता समितियां अभी वजूद में नहीं आ सकी हैं। इन हालातों के मद्देनजर गांवों में गंदगी के अंबार लगे हैं, तो वहीं दफ्तरों में शिकायतें बढ़ रही हैैं। सफाई कर्मियों पर शिकंजा कसने में विभागीय अधिकारी खुद को लाचार महसूस कर रहे हैैं, जिसके पीछे सफेदपोश नेताओं का सफाईकर्मियों पर वरदहस्त होना कारण बताया जा रहा है। हालांकि विभागीय कार्रवाई में अब तक 21 सफाईकर्मी बर्खास्त किए जा चुके हैं। जबकि 14 निलंबित चल रहे हैैं।
बता दें कि जिले में 1756 राजस्व ग्राम हैं, जिनमें 1797 सफाईकर्मियों के पद स्वीकृत हैं। गाइड लाइन के मुताबिक प्रत्येक राजस्व ग्राम में एक सफाईकर्मी की नियुक्ति की गई है, जबकि पांच हजार से अधिक आबादी वाले राजस्व गांवों में दो सफाईकर्मियों की नियुक्ति का प्राविधान हैै। बसपा सरकार में इनकी भर्तियां हुई थीं, जिसके बाद गांव में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी सफाईकर्मियों को सौंप दी गई। व्यवस्था के मुताबिक ग्राम प्रधान इनकी हाजिरी को सत्यापित करते हैं। तब जाकर इनका वेतन आहरित होता है। पिछले कुछ सालों से गांवों में सफाईकर्मियों ने जाना छोड़ दिया है। इसके पीछे सफेदपोश नेताओं का वरदहस्त वजह माना जा रहा है। तो दूसरी वजह यह भी अधिकारियों ने अपनी सुविधाओं के लिहाज से गांव के बजाय कार्यालयों में तैनाती कर रखी है, जहां अन्य कार्यों में लगे हुए हैं। वहीं ग्रामीणों और प्रधानों की शिकायतें दफ्तर की फाइलों में दबकर दम तोड़ रही हैं।
समय-समय पर गांवों में सफाई व्यवस्था की बावत एडीओ पंचायत द्वारा निरीक्षण कराया जाता है। जिन गांवों में सफाईकर्मी नहीं जा रहे हैं, उनका ब्लाकों से ब्यौरा मांगा गया है। लापरवाही बरतने वाले सफाईकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सुधीर कुमार श्रीवास्तव, डीपीआरओ