लखीमपुर खीरी। जिलेभर में कई पुलिस चौकियां और आवास जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं, जिनमें पुलिसकर्मी ड्यूटी करने और परिवार समेत रहने को मजबूर हैं। हालत यह है कि बारिश में छत से पानी टपकता है। दीवारों में दरारें हैं। प्लास्टर झड़ने से हर वक्त हादसे का डर बना रहता है। बता दें कि शनिवार पूर्वाह्न 11 बजे महिला थाने की बाउंड्रीवाल गिर गई थी, जिसकी चपेट में आकर तीन फरियादी घायल हो गए थे। इनमें एक का पैर भी टूट गया था।
शहर में सबसे खराब स्थिति फायर स्टेशन के सामने बने पुलिस आवासों की है, यह आवास जिला कारागार के पुलिस कर्मियों के हैं। जहां दीवारों पर काई जमी हुई है। जगह-जगह बड़ी-बड़ी घास उग आई है। इन भवनों को देखकर साफ लगता है कि ये कभी भी ढह सकते हैं। मिश्राना पुलिस चौकी के आवास भी इसी हाल में हैं। जो पुलिसकर्मी दिन-रात जनता की सुरक्षा करते हैं, वहीं खुद असुरक्षित माहौल में जी रहे हैं। जर्जर भवनों के चलते पुलिस परिवारों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन मरम्मत और पुनर्निर्माण की दिशा में अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
जर्जर हो चुका है गोला कोतवाली का भवन और आवास
गोला गोकर्णनाथ। गोला में ब्रिटिश हुकूमत के समय का बना कोतवाली का भवन व आवास जर्जर हो चुके हैं। शासन से 1.33 करोड रुपए स्वीकृत होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इन्हीं जर्जर आवासों में काफी समय से पुलिसकर्मी रहने को मजबूर हैं। हालांकि कोतवाली भवन के जीर्णोद्धार एवं निर्माण के लिए 1.33 करोड रुपए स्वीकृत होकर निर्माण कराया जा रहा है। प्रभारी निरीक्षक अंबर सिंह ने बताया कि कोतवाली परिसर में महिला आरक्षी के लिए 6 कमरे, पुरुष आरक्षियों के लिए 6 बैरक एवं विवेचना कक्ष सहित निर्माण कार्य होना है साथ कोतवाली भवन का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। संवाद
जर्जर भवन में संचालित हो रही मोहम्मदी पुलिस चौकी
मोहम्मदी। कस्बा मोहम्मदी में पुलिस चौकी किराए के जर्जर भवन में संचालित हो रही है। इस भवन की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें हैं और छत से प्लास्टर झड़ रहा है। बरसात के दिनों में चौकी के अंदर पानी टपकने से हालात और भी खराब हो जाते हैं। चौकी में तैनात पुलिसकर्मी लंबे समय से असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि हर समय यह डर रहता है कि कहीं अचानक भवन गिर न पड़े। स्थानीय लोग भी चौकी को नए भवन में शिफ्ट किए जाने की मांग कर रहे हैं, ताकि पुलिस सुरक्षित वातावरण में अपनी ड्यूटी कर सके।
जवानों के रहने के लिए 24 आवास शासन से मांगे गए थे। छह आवासों की मंजूरी मिली थी, कार्य चल रहा है। जल्द ही अन्य आवासों का भी निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। - पीडी सलौनिया, जेल अधीक्षक
फायर स्टेशन के सामने जर्जर अवस्था में पुलिस आवास। संवाद
फायर स्टेशन के सामने जर्जर अवस्था में पुलिस आवास। संवाद