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सरकार बना रही रिकार्ड, जिले में सूख रहे पौधे

Sun, 10 Jul 2016 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
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हरियाली गायब - फोटो : अमर उजाला
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11 लाख पौधे संभले नहीं, आज लगेगी 12 लाख से अधिक पौध 
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कई रेंज में गायब हो गए पौधे, ट्री गार्ड भी टूटे
सरवाइव करने वाले पौधों का रिकार्ड तक नहीं
प्रदेश सरकार आज सूबे में एक साथ पांच करोड़ पौधे लगाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाने की तैयारी कर रही है, लेकिन जिले में बीते सालों हुए पौधरोपण की स्थिति बेहद खराब रही है। वन महकमे के अधिकारी इसका रिकार्ड भी नहीं दे पा रहे हैं। बीते साल 11 लाख से अधिक पौधे लगाए गए थे, जिनमें से अधिकांश सूख गए, जबकि कई जगह गायब भी हो गए। अधिकांश स्थानों पर पौधों को बचाने के लिए बनाए गए ट्री गार्ड टूट चुके हैं। लोग उनकी ईंट तक उखाड़ ले गए। इधर, जिले में आज फिर 12 लाख 32 हजार 250 पौधे लगाए जाएंगे, जिसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
सरकार की मंशा और बीते साल के पौधरोपण की स्थिति पर गौर करें तो यह बात साफ हो जाती है कि मुख्यमंत्री की प्रदेश में हरियाली बढ़ाने की इच्छा को महकमा ही पूरी नहीं होने दे रहा है। पिछले साल 2015-16 में वन विभाग की ओर से लगभग चार करोड़ खर्च कर रिजर्व फारेस्ट में लगाए 11 लाख से अधिक पौधे कागजों में तो दिख रहे हैं, लेकिन मौके पर कहीं वह सूख गए तो कई जगह गायब ही हो गए। अकेले उत्तरी खीरी वन प्रभाग में कुल 858 हेक्टेअर क्षेत्रफल में पिछले साल लाख 70 हजार 504 पौधे रोपे गए थे, जबकि दक्षिण खीरी वन प्रभाग में तीन लाख 41 हजार 260 पौधे रोपे गए थे। इस पौधरोपण में उत्तर खीरी वन प्रभाग में करीब ढाई करोड़ और दक्षिण खीरी वन प्रभाग में डेढ़ करोड़ से ज्यादा खर्च हुए थे। कितने पौधे सरवाइव कर पाए, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। विभागीय कर्मचारी सिर्फ टालमटोल करते रहे। 
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गोला में भी सूखे पौधे
गोला वन रेंज के 122 हेक्टेयर क्षेत्रफल की 12 साइट में पौधरोपण किया गया था। विभाग का दावा है कि 90 प्रतिशत तक पौधे सफल रहे हैं, लेकिन हकीकत में यहां रिकार्ड पौधे सूख गए हैं। सरवाइव हुए पौधों की जानकारी यहां के रेंजर नहीं दे पाए।
 
निघासन में सूख गए पौधे
निघासन। सिंगाही रोड पर खैरी जंगल के पास वर्ष 2015-16 में कराया गया पौधरोपण सूख गया है। अब यहां सिर्फ गड्ढे और कुछ सूखे तने नजर आते हैं। देखरेख न होने के कारण बड़ी-बड़ी घास जम आई है।
 
पौधरोपण की स्थिति की रिपोर्ट में भी लापरवाही
जिले की हर रेंज से पौधरोपण की स्थिति की वार्षिक रिपोर्ट बनाई जानी चाहिए, लेकिन इसमें लापरवाही हो रही है। जो रिपोर्ट आई है, उसके अनुसार पलिया में 95 प्रतिशत, गोला में 90 प्रतिशत, शारदानगर में 100 प्रतिशत, मैगलगंज में 96 प्रतिशत, मोहम्मदी-महेशपुर में 97 प्रतिशत पौधे जीवित बताए गए हैं।
 
90 से 95 प्रतिशत तक जीवित होने चाहिए
पौधरोपण के लिए शासन से मानक निर्धारित है, जिसके अनुसार जिस साल पौधरोपण किया गया, उस साल जीवित पौधे 95 प्रतिशत होने चाहिए, जबकि अगले वर्ष 90 या 91 प्रतिशत होने चाहिए।
 
क्या कहते हैं जानकार
पर्यावरण के जानकार ज्ञानेंद्र द्विवेदी का कहना है कि जिले में बीते साल किया गया पौधारोपण सफल नहीं हुआ। अधिकांश पौधे सूख गए, चोरी हो गए या फिर जानवर खा गए। यदि सर्वे किया जाए तो 60 प्रतिशत भी पौधे नहीं मिलेंगे। इतना पौधारोपण अगर सरवाइव हो जाता तो जिला हरा हो जाता। इसी तरह पर्यावरण विशेषज्ञ संजय सिंह का कहना है कि देखरेख के अभाव में पौधे नष्ट हुए। यदि महकमे के जिम्मेदार चिंतित होते तो पौधारोपण असफल होने का मतलब ही नहीं।
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पौधों की वार्षिक रिपोर्ट अभी तक नहीं मिल पाई है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। फिलहाल सभी रेंज से पिछले साल के पौधे जीवित है अथवा नहीं या किस स्थिति में हैं, इसकी रिपोर्ट मांग ली गई है।
- संजय कुमार विस्वाल, डीएफओ/नोडल अधिकारी-पौधरोपण
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