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ध्रुवीकरण ने दिलाई जीत, कम मतदान के बावजूद भाजपा पर बरसे वोट

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लखीमपुर खीरी। विधानसभा चुनावों में भाजपा की दोबारा ऐतिहासिक जीत के भले ही कई मायने निकाले जा रहे हों, लेकिन भाजपा के बड़े नेताओं ने यहां ताबड़तोड़ रैली कर वोटों की जमीन को खूब सींचा। जबकि सपा समेत अन्य विपक्षी दलों ने कम सक्रियता दिखाई। हालांकि, जिले का पूरा चुनाव ध्रुवीकरण और जातीय समीकरणों पर लड़ा गया, जिसमें हर रणनीति पर भाजपा विपक्षियों पर भारी रही और उसकी झोली में जमकर वोट बरसे।
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पिछले चुनाव में जहां जिले में 68.60 फीसदी मतदान हुआ था। वहीं इस बार 0.49 फीसदी कम यानि 68.11 फीसदी मतदान होने के बावजूद भाजपा ने पिछले चुनाव के मुकाबले जिले में 74,810 वोट ज्यादा हासिल किए। 23 फरवरी को चौथे चरण में जब जिले में मतदान हुआ तो चुनाव परिणाम इस तरीके से आएंगे यह किसी ने नहीं सोचा था। यहां तक कि एग्जिट पोल में भाजपा को बढ़त के बावजूद भाजपा प्रत्याशी अपनी जीत को लेकर संशय में थे, लेकिन 10 मार्च को आए चुनाव परिणामों ने ख़ुद भाजपा प्रत्याशियों को भी हैरान किया है।
क्योंकि, जिले में पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार 0.49 फीसदी कम मतदान होने के बावजूद भाजपा का वोट बढ़ा है। पिछले चुनाव में भाजपा को जिले की आठों सीटों पर कुल 8,49,178 वोट मिले थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा 74,810 वोट बढ़कर 9,23,988 पर पहुंच गया है। चुनाव के दौरान सत्ता विरोधी लहर का कोई असर नहीं दिखा। भाजपा की यह जीत भले ही चौंकाती हो लेकिन इस अप्रत्याशित जीत के लिये भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से लेकर जमीनी कार्यकर्ता तक ने जमीन पर उतरकर चुनावी फसल को ख़ूब सींचा। जबकि, मुख्य विपक्षी सपा समेत अन्य दल इसमें मात खा गए।
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नड्डा से लेकर अमित शाह और योगी तक आए, अखिलेश सिर्फ एक रैली कर सके- जिले में भाजपा के पक्ष में केंद्रीय नेतृत्व ने भी जमकर पसीना बहाया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 14 फरवरी को औरंगाबाद और धौरहरा में रैली की तो 17 फरवरी को केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने मोहम्मदी में रैली कर जिले की आठों विधानसभा का जिक्र कर पूरे जिले को साधा।
उधर, माहौल का रुख भांपते हुए 20 फरवरी को सीएम योगी ने एक ही दिन में मोहम्मदी, गोला, निघासन, कस्ता और फरधान में ताबड़तोड़ पांच जनसभाएं कर सत्ता विरोधी लहर को भाजपा के पक्ष में कर दिया। जबकि, भाजपा के बड़े नेताओं के जवाब में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 19 फरवरी को आठों प्रत्याशियों के साथ लखीमपुर के जीआईसी मैदान पर जिले में सिर्फ एक रैली कर सके। संवाद
प्रत्याशी नहीं योगी-मोदी के चेहरे पर पड़े वोट - जिले में चुनाव किन मुद्दों पर लड़ा जाएगा, इसकी बानगी 14 फरवरी को उस वक्त दिखाई पड़ी जब कस्ता विधानसभा क्षेत्र के मुस्लिम बहुल इलाके औरंगाबाद की रैली में जेपी नड्डा ने मुख्तार, आजम और सपा के आतंकियों के मददगार होने का जिक्र कर चुनावी संग्राम में ध्रुवीकरण की रणभेरी फूंक दी।
बाद में अमित शाह और योगी की जनसभा में भी ध्रुवीकरण का मुद्दा खूब उछला, जो कि भाजपा के लिए तुरुप का इक्का बना। उधर, मुस्लिम बहुल इलाके खीरी टाउन में ओवैसी की रैली ने भी ध्रुवीकरण के मुद्दे को खूब धार दी, जिससे मुस्लिम बहुल इलाकों में जहां भाजपा को न के बराबर वोट मिले। वहीं सपा ने बढ़त बनाई और पूरा मुस्लिम एकजुट होकर सपा के पक्ष में गया।
दूसरी तरफ जनता ने स्थानीय प्रत्याशी की जगह योगी-मोदी के चेहरे पर वोट डाला, जिससे स्थानीय प्रत्याशियों के विरोध के बावजूद भाजपा को इसका फायदा मिला। उधर, कुछ लोगों ने यह भी बताया कि स्थानीय प्रत्याशियों से बेरुखी होने से उन्होंने भाजपा को वोट न देने की बात सोची थी मगर पोलिंग स्टेशन पर सपा के पक्ष में एक मुश्त मुस्लिम वोटों को पड़ते देख, उनका मन बदल गया और उन्होंने स्थानीय प्रत्याशी के खिलाफ नाराजगी को दरकिनार कर योगी और मोदी के चेहरे पर वोट डाला। संवाद
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