महेवागंज। सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना फूलबेहड़ में पूरी तरह दम तोड़ती नजर आ रही है। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई ओवरहेड टंकी महीनों से शोपीस बनी खड़ी है, जबकि कस्बा और ग्राम पंचायत फूलबेहड़ के हजारों लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं।
वर्ष 2014-15 में जल निगम की तरफ से करीब 600 किलोलीटर क्षमता की पाइप पेयजल टंकी का निर्माण कराया गया था। लाखों रुपये खर्च कर आसपास के गांवों तक पाइपलाइन भी बिछाई गई, लेकिन यह पूरी व्यवस्था अब केवल कागजों में ही चल रही है। ग्रामीणों के अनुसार, शुरुआत के कुछ ही दिनों तक पानी की सप्लाई हुई, उसके बाद व्यवस्था धीरे-धीरे ठप होती चली गई। बीते एक साल से पूरी तरह जलापूर्ति बंद है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।
करीब 10 से 12 हजार की आबादी इस जलसंकट की चपेट में है। हालात यह हैं कि विकास खंड मुख्यालय से सटी ग्राम पंचायत होने के बावजूद लोग हैंडपंप, निजी समरसिबल और दूरदराज के स्रोतों पर निर्भर हैं। गर्मी का मौसम दस्तक दे रहा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीण धीरज कटियार, लईक और गुड्डू का कहना है कि एक साल से नलों में पानी नहीं आया। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। लोगों का आरोप है कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में हालात और भयावह हो जाएंगे।
फूलबेहड़ जलकल की जेई नेहा पांडे का कहना है कि योजना एक फर्म को सौंपी गई है और फिलहाल डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) मांगी गई है। जल्द ही जलापूर्ति बहाल कराई जाएगी।