लखीमपुर खीरी। विधानसभा चुनाव 2022 में विभिन्न मुद्दों के अलावा मतदाताओं के बीच सीएम (मुख्यमंत्री) के चेहरे पर भी चर्चा हो रही है। इससे पहले के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों और पार्टी को केंद्र में रखकर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करते थे। इसका असर 2017 तक चुनाव में देखने को भी मिला था, जब भाजपा ने बगैर सीएम के चेहरे के चुनाव में बम्फर जीत हासिल की थी। तब पीएम मोदी ही पार्टी का चेहरा थे।
इस बार विधानसभा चुनाव में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के पास सीएम चेहरा है। भाजपा के पास इस बार सीएम के रूप में योगी आदित्यनाथ हैं। सपा के पास अखिलेश यादव, बसपा के पास मायावती और कांग्रेस के पास प्रियंका वाड्रा गांधी सीएम चेहरा हैं। पहले चरण का मतदान हो चुका है, जिसके साथ ही चुनाव प्रचार तेजी पकड़ने लगा है।
चौथे चरण में 23 फरवरी को आठ विधानसभा सीटों के लिए मतदान कराया जाएगा। अभी डोर टू डोर और सोशल मीडिया के जरिए चुनाव प्रचार किया जा रहा है। मतदाताओं के बीच क्षेत्रीय मुद्दों के बजाय राष्ट्रवाद और जातिवाद पर चर्चा हो रही है। प्रत्याशियों को लेकर मतदाताओं के बीच चर्चा कम हो रही है, बल्कि सीएम व पार्टी को लेकर ज्यादा तवज्जो दी जा रही है।
खासकर निचले तबके के मतदाता जिन्हें विधायकों द्वारा कोई तवज्जो नहीं मिलती, उनके नजरिए में बदलाव दिख रहा है। ऐसे मतदाता अपनी विधानसभा के प्रत्याशियों से ज्यादा मुख्यमंत्री के चेहरे पर चर्चाएं कर रहे हैं, तो वहीं आम मतदाता के बीच भी सीएम के कामकाज को लेकर तुलना की जा रही है। वर्तमान सरकार के कामकाज और पिछली सरकारों के कामकाज पर बहस छिड़ी है।
कई चुनावों में मतदान कर चुके हैं। प्रत्याशी जीतने के बाद जनता से नहीं मिलते। चाहे किसी भी दल के विधायक हों, उनसे काम भी नहीं पड़ता। मुख्यमंत्री अच्छा है तो जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचता है। इसलिए प्रत्याशी से ज्यादा महत्वपूर्ण सीएम का चुनाव मायने रखता है।
संतोष कुमार, मतदाता
यह विधायक से ज्यादा सरकार चुनने का चुनाव है। कई दलों के प्रत्याशी मतदाताओं को अपने तरीकों से लुभा रहे हैं, लेकिन जिसका कामकाज अच्छा होगा उसे ही वोट मिलेगा। जनता ने सीएम के तौर पर योगी, अखिलेश और मायावती का काम देखा है। इसलिए इनमें जो बेहतर होगा उसका ही सपोर्ट किया जाएगा।
संदीप कुमार, मतदाता
सभी दलों के प्रत्याशी अपने एजेंडे के मुताबिक जनता से संपर्क करके वोट मांग रहे हैं, लेकिन अब जनता भी काफी समझदार हो गई है। सोशल मीडिया के जरिए गांवों तक सूचनाएं व जानकारियां साझा की जा रही हैं। इससे मतदाताओं के बीच प्रत्याशियों से ज्यादा सीएम के चेहरे पर चर्चा हो रही है, जिसका कामकाज जनता को पसंद होगा उसी को वोट करेंगे।
अमिय त्रिपाठी, मतदाता
मतदाताओं को प्रदेश की सरकार बनाने का मौका मिला है। विधायक तो विधानसभा का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि सीएम के नेतृत्व वाली सरकार लोगों तक योजनाएं पहुंचाती है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था का दारोमदार सीएम पर होता है। ऐसे में लोग प्रत्याशियों से ज्यादा सीएम चेहरे को वरीयता दे रहे हैं।
डॉ. सुधाकर मिश्रा, मतदाता
संतोष कुमार- फोटो : LAKHIMPUR
डॉ. संदीप कुमार- फोटो : LAKHIMPUR
अमिय त्रिपाठी- फोटो : LAKHIMPUR