गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर खीरी)। गन्ना, गेहूं हो या धान, अन्नदाता किसान को बेहाल सिस्टम की मार झेलनी पड़ रही है। उपज का वाजिब दाम तो मिलना दूर किसानों को खुले आसमान के नीचे अपनी उपज के साथ कई-कई दिन और रात गुजारने पड़ रहे हैं। आलम यह है कि कृषि उत्पादन मंडी समिति में कई दिनों से किसान अपना धान लेकर पड़े हैं लेकिन उनका धान कभी नमी तो कभी कुछ अन्य कमी बताकर तौलने से रोक दिया जाता है। हैरत की बात तो यह है कि यहां मंडी निदेशक से लेकर कई अफसर आ चुके है लेकिन किसानों की समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है। बुधवार रात मंडी में धान लेकर आए किसानों को देखा तो व्यवस्था के दावों की हकीकत देखने को मिली। कुछ किसान धान से भरी ट्रॉली के नीचे चादर ओढ़कर लेटे थे तो कुछ डस्टर से धान साफ कर रहे हैं। उनका कहना था कि कल कही सेंटर इंचार्ज उनके धान में नमी बताकर फिर रिजेक्ट न कर दे। इन किसानों को मंडी में पेयजल की सुविधा तो है लेकिन खाना या चाय के लिए उन्हें बाहर ही जाना पड़ता है। पेश है किसानों के साथ बिताई एक रात का हाल।
लगता है देश पर बोझ हैं किसान
मंडी समिति में ट्रॉली के पास मच्छरदानी लगाकर खुले आसमान के नीचे लेटे हजरतपुर के रंजीत सिंह ने बताया कि वह 25 अक्तूबर को धान लेकर आए थे। न टोकन मिला न नंबर आया। खाना घर से मंगा लेते है चाय पीने के लिए बाहर जाना पड़ता है । कहा-ऐसा लगता है कि किसान देश पर भार हो गया है।
कहीं सेंटर इंचार्ज धान रिजेक्ट न कर दे
मंडी समिति में बुधवार की रात 10 बजे आरएफसी सेकेंड धान क्रय केंद्र के सामने डस्टर से धान साफ कर रहे पूजा गांव के जर्मन सिंह, गोंधिया के जगसीर और जगरूप सिंह ने बताया कि वह 19 अक्तूबर को धान लेकर आए थे। हो सकता है कल नंबर आ जाए। इसलिए डस्टर से धान साफ कर रहे हैं, फिर भी सेंटर इंचार्ज के रिजेक्ट करने का अंदेशा बना रहता है।
जितना सुखाओ..रात में नम हो जाता है धान
बुधवार की रात 10:15 बजे मंडी समिति में डस्टर से धान साफ करा रहे बसलीपुर के अमरजीत सिंह ने बताया कि 20 अक्तूबर को धान लेकर आए थे। अब आरएफसी फर्स्ट पर नंबर आया है। जितना दिन में सुखाओ रात में वहीं धान फिर नम हो जाता है।
अब मंडी तो आ गए देखो कब नंबर आता है
मंडी समिति में रात के अंधेरे में ट्रॉली के नीचे बंधी खाट पर लेटे बुझौना निवासी किसान विवेक दीक्षित ने बताया कि धान बेचने के लिए मंडी तो आ गए हैं। रजिस्ट्रेशन भी करा दिया है लेकिन टोकन अभी नहीं मिला है। अब देखो कब नंबर आता है।
जिला प्रशासन करता है कई सुविधाओं का दावा
एसडीएम अखिलेश यादव एवं सचिव बृजभान सिंह ने बताया कि प्रत्येक धान क्रय केंद्र पर बैठने के लिए कुर्सियां और पेयजल की व्यवस्था है। मंडी परिसर में तीन आरओ, शौचालय हैं। किसान विश्रामगृह निर्माणाधीन है।
एसडीएम अखिलेश यादव ने धान क्रय केंद्रों का निरीक्षण कर केंद्र प्रभारियों को निर्देशित किया कि मंडी परिसर में आए जिन किसानों का टोकन एलाट हो गया है। केंद्र प्रभारी उस किसान की ट्रॉली पर जाकर गुणवत्ता और मानक देखकर किसान को स्पष्ट बताएं कि धान खरीदा जा सकता है या नहीं। ताकि किसानों को मंडी समिति में कई-कई दिन न बिताने पड़ें। संवाद