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औने-पौने दामों में धान बेचने को मजबूर हैं किसान

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ममरी में फड़ पर लगा धान। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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ममरी। पिछले सीजन का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान अब तक न मिलने से परेशान किसान खेती-बाड़ी और घरेलू खर्च चलाने के लिए अपना धान ममरी, महेशपुर, रोशननगर के फड़ व्यापारियों के हाथ 900 से एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचने को विवश हो रहे हैं। ऐसे में फड़ व्यापारी अपना धान मंडी में बिक्री कर मुनाफा कमा रहे हैं।
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किसानों का कहना है कि करवाचौथ, दीवाली, भैयादूज के त्योहार सिर पर हैं, साथ ही गन्ने, धान की फसल से खाली हुए खेतों में लाही, मसूर की बुवाई करना है। उधर, गोला चीनी मिल पर पिछले सीजन का बकाया गन्ने का भुगतान उन्हें अब तक नहीं मिल पाया है। ऐसी हालत में उन्हें अपना धान ममरी, महेशपुर, रोशननगर आदि स्थानों के फड़ व्यापारियों के हाथ 900 से एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचकर खर्च चलाना पड़ रहा है। फड़ व्यापारी यही धान गोला की मंडी में 1200 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक्री कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। ममरी के फड़ व्यापारी बृजकिशोर वर्मा उर्फ मझिले, नीरज गुप्ता, महेशपुर के राकेश गुप्ता का कहना है कि गोला मंडी में धान की इतनी छीछालेदर हो रही है कि उन्हें अपना धान राइस मिलों पर नकद में 1200 रुपये और उधार में 1400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक्री करना पड़ रहा है जिससे उनका भाड़ा भी नहीं निकल पा रहा है उन्होंने इसे अपनी मजबूरी बताया है।
रोशननगर के किसान अनीश का कहना है कि वह करीब 10 क्विंटल धान 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से व्यापारियों के हाथ बेंच चुके हैं फिर भी खर्चे पूरे नहीं हो पा रहे हैं, जबकि चीनी मिल पर उनका भुगतान बकाया है।
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भिम्मापुर के किसान बबलू का कहना है कि उसने जरूरत के लिए अपना धान फड़ व्यापारी के हाथ 900 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेच दिया। क्योंकि मंडी समिति में छोटे किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है। संवाद
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