लखीमपुर खीरी। खीरी जिले के 7680 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में 2201.75 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है। इसके अलावा सड़कों के किनारे लगे पेड़-पौधे और बाग-बगीचे अलग हैं। तराई बेल्ट होने से जिले में हरियाली की कोई भी कमी नहीं है, फिर भी हर वर्ष जिले में लाखों पौधे रोपित किए जाते हैं, ताकि हरियाली यूं ही बनी रहे।
जनपद में तीन सालों में 2.88 करोड़ से अधिक पौधे रोपित किए हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023-24 में 95.21, वर्ष 2024-25 में 96.18 लाख और 2025-26 में 96.75 लाख पौधे रोपित कराए गए। सभी पौधों की जीओ टैगिंग कराई जाती है, ताकि उनकी निगरानी होती है। अनदेखी के अभाव में हर वर्ष काफी पौधे नष्ट भी हो जाते है।
पिछले तीन सालों में अब तक कितने पौध नष्ट हुए इसका आंकड़ा विभागीय अफसर बताने से कतराते हैं, लेकिन विभागीय सूत्रों की मानें तो हर वर्ष 30 से 35 प्रतिशत पौधे नष्ट हो जाते हैं। वर्ष 2024-25 के आंकड़ों पर नजर डालें तो 96.18 लाख रोपित पौधों में 60 प्रतिशत यानी करीब 57.70 लाख पौधे सुरक्षित हैं। वहीं वन विभाग के अपने दो सालों में रोपित पौधों की रिपोर्ट सामने आई है। वन विभाग के वर्ष 2023-24 में 24.84 लाख में 23.85 लाख पौधे और वर्ष 2024-25 में 24.15 लाख के सापेक्ष 23.67 पौधे जीवित हैं।
वहीं अन्य विभागों के वर्ष 2023-24 में 70.37 लाख में 49.26 लाख जीवित हैं। वहीं वर्ष 2024-25 में 96.18 लाख के सापेक्ष 73.99 लाख पौधे जीवित होने का दावा किया जाता है।
ग्राम विकास ने तीन सालों में अकेले रोपे 1.26 करोड़ पौधे
प्रत्येक वर्ष पौध रोपण अभियान में सबसे ज्यादा लक्ष्य ग्राम्य विकास को दिया जाता है। ग्राम्य विकास ने तीन सालों में 1.26 करोड़ पौधे रोपित किए हैं। वर्ष 2023-24 में 41.88 लाख पौधे रोपित कर 188282 लाख मानव दिवस सृजित कराए। वर्ष 2024-25 में 43.24 लाख पौधे रोपित कराकर 206390 मानव सृजित किराए। इस साल 2025-26 में 41.88 लाख पौध रोपित किए। मानव सृजन का आंकड़ा अभी नहीं आ सका। डीसी मनरेगा सुशांत सिंह ने बताया कि प्रत्येक पौधे की जीओ टैगिंग होने से उनकी निगरानी होती रहती है। अधिकांश पौधे जीवित है। किसी कारण वश कुछ पौधे नष्ट हो गए।
9000 हेक्टेयर वन क्षेत्र में अवैध कब्जा
लखीमपुर जिले के 2201.75 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में से करीब 9000 हेक्टेयर वन क्षेत्र पर अवैध कब्जा है। यहां हरियाली उजाड़ कर खेती की जा रही है, जबकि यह अतिक्रमित वन भूमि वन क्षेत्र के आंकड़ों में दर्ज है।
सड़क चौड़ीकरण में काटे जाते हैं पेड़
पिछले पांच सालों में जिले में कोई नई व बड़ी सड़क व हाइवे का निर्माण नहीं कराया गया, जिसके चलते बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई नहीं की गई। हां, छोटी-छोटी सड़कों का चौड़ीकरण में कुछ पेड़ों की कटाई जरूर हुई है, जिसमें शहर के डॉन बास्को स्कूल से राजापुर सड़क चौड़ीकरण में करीब 30 से 35 पेड़ों को काटना पड़ा। वहीं एलआरपी चौराहे से इंदरा मनोरंजन पार्क तक सड़क चौड़ीकरण में इसी तरह पेड़ काटे गए है।
इस वर्ष जिले में 96.75 लाख पौधों का रोपण किया गया है। रोपे गए पौधों की सही तरीके से देखभाल हो सके इसके लिए हरितिमा एप के जरिए निगरानी की जाएगी। इस साल रोपे गए पौधों में से करीब 35 लाख का डाटा हरिमिता एप पर अपलोड किया जा चुका है। -संजय बिस्वाल, डीएफओ साउथ खीरी