गुस्साई आशाओं ने घेरा एनएचएम कार्यालय, नाराज आशाओं ने की बैठक
सीएमओ ने 24 सितंबर 2016 को बकाया भुगतान करने के किए थे आदेश
पिछले कई सालों का बकाया भुगतान न मिलने से नाराज आशा वर्करों ने वृहस्पतिवार को मौजी नसीरूद्दीन मैदान में बैठक की। उसके बाद सीएमओ कार्यालय पहुंची जहां सीएमओ के न मिलने पर उन्होंने एनएचएम कार्यालय के बाबू का घेराव कर बकाया मानदेय दिलाने की मांग की। कार्यालय के बाबू ने उनकी बात अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है।
आशा वर्करों ने कई सालों का बकाया मानदेय न मिलने पर 24 सितंबर 2016 को सीएमओ को ज्ञापन दिया था। जिस पर सीएमओ ने सीएचसी व पीएचसी के अधीक्षकों को आशा वर्कर एवं संगिनियों के लंबित भुगतान 15 दिन में कराने के निर्देेश दिए थे। साथ ही इस अवधि में भुगतान न होने पर संबंधित बाबू के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन सीएचसी व पीएचसी के अधीक्षक और प्रभारियों ने सीएमओ के आदेश को दरकिनार कर आज तक आशा वर्करों का बकाया भुगतान नहीं किया। बकाया भुगतान की खातिर आशा वर्कर सीएचसी से लेकर सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
...तो क्या कमीशन के चक्कर में नहीं होता भुगतान
आशा वर्करों का पिछले कई सालों का मानदेय बकाया है, लेकिन सीएचसी व पीएचसी के संबंधित बाबू इनका भुगतान नहीं कर रहे हैं, वह भी सीएमओ के आदेश के बावजूद। आशा वर्करों का कहना है कि भुगतान के बदले कमीशन की मांग की जाती है। जो लोग कमीशन दे देते हैं उन्हीं का भुगतान किया जाता है और बाकी का भुगतान रोक दिया जाता है। आशा वर्करों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि इस मामले की जानकारी अधिकारियों को नहीं हैं लेकिन फिर भी सब अंजान बने हैं।
जननी सुरक्षा योजना का बजट शॉर्ट है, जिसके लिए शासन को डिमांड भेजी गई है। बजट मिलते ही भुगतान होना शुरू हो जाएगा।
डॉ. मातादीन एसीएमओ एवं नोडल प्रभारी एनएचएम
बकाया भुगतान के लिए सीएचसी व पीएचसी अधिकारियों को निर्देशित किया गया था। भुगतान फिर भी नहीं हुआ है तो यह गंभीर मामला है, जिसके लिए जिम्मेदारों से जवाब तलब किया जाएगा।
डॉ.जावेद अहमद