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किलकारी की गूंज में बढ़ रहा ऑपरेशन का दखल

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महिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने के लिए बैठीं महिलाएं।
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नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट : बीते पांच साल में ऑपरेशन से प्रसव में आठ फीसदी बढ़त
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पिछले वर्ष ऑपरेशन से जन्मे थे 835 बच्चे, डॉक्टर बोले, बदली जीवन शैली इसका कारण
लखीमपुर खीरी। जिले में किलकारी की गूंज में सिजेरियन डिलीवरी का दखल बढ़ता जा रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच साल में ही जिले में ऑपरेशन से होने वाले प्रसव में आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2015-16 में जिले में जहां 6.2 प्रतिशत ऑपरेशन से प्रसव हुए थे तो वहीं 2020-21 में इनकी संख्या बढ़कर 14.2 हो गई है। वहीं सरकारी अस्पतालों में 2015-16 में जहां 4.7 प्रतिशत प्रसव ऑपरेशन से हुए थे तो वहीं 2020-21 में 6.7 प्रतिशत हुए। ऑपरेशन से बढ़ते प्रसव का कारण डॉक्टर जीवन शैली में होने वाले बदलाव को मान रहे हैं। इनका कहना है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं शारीरिक श्रम न करके पूरी तरह से आराम करती हैं। यही सबसे बड़ा कारण है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट में पिछले सर्वे की अपेक्षा इस बार सिजेरियन प्रसव में आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी बताई गई है। सरकारी अस्पतालों में यह वृद्घि मात्र दो फीसदी है। डॉक्टरों का कहना है कुछ साल पहले तक एकाध डिलीवरी ही ऑपरेशन से होती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इसमें दिन पर दिन बढ़ोतरी हो रही है। इसके तमाम कारण हैं, लेकिन मुख्य वजह गर्भधारण के बाद महिलाओं का पूरी तरह से आरामतलबी है। गर्भावस्था में घरेलू कामकाज करना पूरी तरह से बंद कर देती हैं। शारीरिक श्रम न करने से ऑपरेशन से प्रसव होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। यदि महिलाएं घरेलू काम के साथ गर्भावस्था के दौरान किए जाने वाले व्यायाम, योग आदि करती रहें तो सामान्य प्रसव भी सकता है। हालांकि कुछ स्थितियों में सिजेरियन प्रसव की करना पड़ता है।
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प्रसव पीड़ा भी है एक कारण
महिला डॉक्टर बताती हैं कि कई बार सब कुछ सामान्य होने के बावजूद महिलाएं ऑपरेशन से प्रसव कराना पसंद करती हैं। इसका कारण प्रसव के दौरान होने वाली पीड़ा है। ऑपरेशन होने से इस दर्द से छुटकारा मिल जाता है, लेकिन ऑपरेशन के बाद जरा सी असावधानी काफी मुश्किलें खड़ी कर सकती है। वहीं सिजेरियन प्रसव से नार्मल डिलीवरी करने में जोखिम ज्यादा रहता है।
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ऑपरेशन से प्रसव होने का कारण
1. पहला बच्चा ऑपरेशन से होने पर ज्यादा मामले में दूसरा बच्चा भी ऑपरेशन से होता है।
2. बच्चे की स्थिति ठीक न हो, सिर ऊपर और पैर नीचे होने की स्थिति में ऑपरेशन के चांस बढ़ जाते हैं।
3. बच्चे की पोजीशन टेढ़ी हो या फिर वह बार- बार अपनी स्थिति बदल रहा हो।
4. हार्ट की समस्या एवं शुगर आदि होने पर प्रसव ऑपरेशन से हो सकता है।
5. यदि पहले गर्भपात हुआ हो या जुड़वा बच्चे होने पर भी सिजेरियन प्रसव की संभावना बढ़ जाती है।
6. इसके अतिरिक्त कई बार इमरजेंसी की स्थिति बनने पर सर्जरी का फैसला ले लिया जाता है।

ये हैं जोखिम
1. कुछ महिलाएं मानती हैं कि सिजेरियन प्रसव में दर्द नहीं होता, लेकिन बाद में दर्द बर्दाश्त करना पड़ सकता है।
2. कई मामले में ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक खून बहने पर गर्भवती की स्थिति गंभीर हो सकती है। अक्सर जान पर भी बन जाती है।
3. कई मामलों में सर्जरी के बाद संक्रमण का भी खतरा रहता है। वहीं खून के थक्के बनने का रिस्क बढ़ जाता है।
4. जरा सी लापरवाही में टांके टूटने या फिर उनके पकने की समस्या बन सकती है। इसकी वजह से गंभीर दिक्कतें तक महिला झेलनी पड़ती है।

एनएफएचएस - सिजेरियन प्रसव- सरकारी अस्पताल
2015-16 - 6.2 प्रतिशत- 4.7 प्रतिशत
2020- 21 - 14.2 प्रतिशत- 6.7 प्रतिशत
गतवर्ष जिले में हुए प्रसव- 61519
नार्मल प्रसव- 60654
सिजेरियन प्रसव- 835
महिला अस्पताल
एक से 12 अप्रैल तक प्रसव-175
मेजर ऑपेरशन- 22
माइनर ऑपरेशन- 51

लोगों की जीवन शैली काफी बदल गई है। गर्भावस्था की जानकारी लगते ही महिलाएं शारीरिक श्रम करना बिल्कुल बंद कर देती हैं, जबकि पहले महिलाएं गर्भवती होने पर भी घर से लेकर बाहर तक के कामधाम निपटाती थीं। कुछ मामले ऐसे भी सामने आए हैं कि प्रसव पीड़ा से बचने के लिए महिलाएं सिजेरियन प्रसव कराने में रुचि रखती हैं। इन सबके कारण सिजेरियन प्रसव बढ़ रहा है।
- डॉ. मीनाक्षी, स्त्री एवं प्रसूत रोग विशेषज्ञ, महिला अस्पताल
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