फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

15 छात्रों में सिर्फ अनुराग पहुंचा शेल्टर होम, अब्दुल मन्नान रोमानिया बॉर्डर पर ही फंसा

विज्ञापन
अरविंद यादव से अनुराग और हर्षित की जानकारी लेते उनके मित्र और रिश्तेदार।
विज्ञापन
13 छात्रों के परिजन अपने लाडलों की सकुशल वापसी के लिए कर रहे प्रार्थना
विज्ञापन

परिजन बोले, फोन पर बात नहीं कर पा रहे हैं बच्चे, बढ़ती जा रही है बदसलूकी
लखीमपुर खीरी। यूक्रेन में फंसे जिले के 15 छात्रों में अब तक सिर्फ मोहम्मदी के अनुराग यादव के यूक्रेन से बाहर निकलने की जानकारी मिली है, जबकि खजुरिया के अब्दुल मन्नान रोमानिया बॉर्डर पर फंसे हैं। हालांकि, उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है, जबकि अन्य 13 छात्रों के परिजन अपने लाडलों की सकुशल वापसी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
परिजन बताते हैं कि दिन पर दिन हालात खराब होते जा रहे हैं और बच्चों के साथ अब बदसलूकी बढ़ती जा रही है। परिजन का कहना है कि उनके बच्चों को ठीक ढंग से खाना नहीं मिल पा रहा है और अब यूक्रेन की सेना भी बच्चों के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार कर बच्चों की पिटाई कर रही है।
विज्ञापन


अनुराग का चचेरा भाई हर्षित खारकीव के बंकर में फंसा
लखीमपुर खीरी। यूक्रेन में फंसे 15 छात्रो में सिर्फ मोहम्मदी के अनुराग यादव यूक्रेन संकट से बाहर निकल सके हैं, जबकि अब भी 14 छात्रों के लिए मुश्किल भरी घड़ी आसान नहीं हुई है। करीब 40 घंटे से भी ज्यादा वक्त रोमानिया बॉर्डर पर बिताने के बाद अनुराग सोमवार की दोपहर एक बजे के बाद रोमानिया के शेल्टर होम पहुंचे हैं, जहां से फ्लाइट के जरिये उन्हें स्वदेश वापस लाया जाएगा, जबकि उनके चचेरे भाई हर्षित यादव अभी भी खारकीव के बंकर में फंसे हुए हैं।
मोहम्मदी निवासी अरविंद यादव ने बताया कि उनका बेटा अनुराग यादव पिछले 40 घंटे से भी ज्यादा वक्त से रोमानिया बॉर्डर पर फंसा हुआ था। टरपोनिल शहर से यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उसे बॉर्डर तक पहुंचाया था, लेकिन, राजन्यायिक सहमति न बन पाने की वजह से भारतीय छात्रों की रोमानिया के अंदर प्रवेश नहीं मिल पा रहा था। उन्होंने बताया कि रोमानिया की सरकार छात्रों से अस्थायी वीजा की मांग कर रही थी, जो कि छात्रों के पास नहीं था। बताया कि सहमति न बन पाने के कारण रोमानिया के अधिकारियों ने छात्रों को शेल्टर होम जाने की सलाह दी, जिसके बाद सोमवार दोपहर एक बजे के बाद अनुराग शेल्टर होम पहुंच सका। अनुराग के पिता ने बताया कि शेल्टर होम में भी पांच हजार से ज्यादा छात्र हैं, ऐसे में अनुराग की वापसी में करीब एक हफ्ते का समय और लग सकता है। उन्होंने बताया कि जिस तरह पोलैंड के राजदूत के कहने पर भारतीय छात्रों को पोलैंड में प्रवेश मिल सका, उसी तरह केंद्र सरकार को रोमानिया के राजदूत से पोलैंड की तरह सहमति बनानी चाहिये, जिससे भारतीय छात्रों को आसानी से रोमानिया में प्रवेश मिल सके और वह सुरक्षित तरीके से वतन वापसी कर सकें। उन्होंने बताया कि भतीजा हर्षित यादव अभी भी खारकीव के हॉस्टल के बंकर में छिपा है। रूसी सेना की बमबारी उसे डरा रही है। दिन पर दिन खाने पीने की भी किल्लत बढ़ती जा रही है।

अब्दुल ने बताया, मोबाइल से बात करने पर भी है पाबंदी
संपूर्णानगर के खजुरिया निवासी बकरीदन अंसारी ने बताया कि पुत्र अब्दुल मन्नान से सोमवार सुबह साढ़े चार बजे बात हुई थी। वहां अब मोबाइल से बात करने पर भी पाबंदी लगाई जा रही है। सुबह भी एक मिनट बात हो पाई। रोमानिया बार्डर बस से आ गए हैं। वहीं भारतीय दूतावास में फोन करने के बावजूद कोई बात नहीं हो पा रही है। इस समय बेटा कहां है, इसकी जानकारी नहीं हो पा रही है। डीएम से निवेदन है कि भारत सरकार से मदद के लिए कहे ताकि भारतीय बच्चे सकुशल वापस लौट सकें।

बंकर में है बेटा, नहीं मिल रहा आने का कोई रास्ता
पलिया के मोहल्ला किसान द्वितीय निवासी व्यापारी मुकेश गोयल के पुत्र ऋषभ गोयल यूक्रेन में फंसे हैं। पिता मुकेश गोयल ने बताया कि रोजाना पुत्र से बात हो रही है, पर वहां के हालातों में कुछ खास कमी होती दिखाई नहीं दे रही है। उनका पुत्र यूनिवर्सिटी हॉस्टल के बंकर में है और सुरक्षित है, लेकिन आखिर कब तक बंकर में रहेगा। वहां के हालात को देखते हुए भारत सरकार यूक्रेन में बंकर में रह रहे लोगों को किसी तरह से सुरक्षित लाने के प्रयास करे। बंकर में कब तक खाने-पीने का सामान मिलता रहेगा यह भी सोचनीय है।

पोलैंड बार्डर से लौटाया, अब की जा रही पिटाई
संपूर्णानगर के गोविंदनगर निवासी ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि उनका पुत्र शिवम यूक्रेन में फंसा है। आप मीडिया वाले ही हमारी कुछ मदद कीजिए। बच्चों को मदद नहीं मिल पा रही है। बोले कि हेल्पलाइन नंबर पर कोई बात नहीं करता है। भारतीय दूतावास ने भी अब तक बच्चे से संपर्क नहीं किया है। पोलैंड बार्डर से उनके पुत्र शिवम को वापस भेजा गया है, जो इस समय लिबिब शहर के हॉस्टल में है, जहां यूक्रेनी आर्मी व पुलिस छात्र-छात्राओं की पिटाई कर रही है। हॉस्टल में इस समय 80 बच्चे हैं, जो खाने के लिए तरस रहे हैं। अगर इसी तरह चलता रहेगा तो मदद की उम्मीद कम है। भारत सरकार जल्द से जल्द छात्रों को वापस लाने के प्रयास करे।
विज्ञापन


अभी भी बंकर में फंसा है भाई, नहीं हो सका कोई उपाय
संपूर्णानगर के छात्र नबील अहमद खान के चचेरे भाई डॉ. आईए खान ने कहा कि हमारा भाई अब भी बंकर में है। वहां पर अधिक छात्र होने के कारण रहने, खाने के साथ ही अन्य समस्याएं आ रही हैं। कई बार प्रयास कर मदद की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई संपर्क नहीं हुआ है। भारतीय दूतावास से संपर्क किया, लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें