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एक यूनिट रक्त दान थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे के लिए बन सकता है वरदान

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महादानी बनने के लिए करें रक्तदान, जिला अस्पताल में शिविर आज
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ब्लड बैंक में सुबह 10 से दोपहर दो बजे लगेगा शिविर
लखीमपुर खीरी। अमर उजाला फाउंडेशन का रक्तदान शिविर मंगलवार को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में लगेगा। इसका उद्घाटन मुख्य अतिथि डीएम महेंद्र बहादुर सिंह और विशिष्ट अतिथि एसपी संजीव सुमन करेंगे। जरूरतमंद बच्चे, बड़े और महिलाओं की जान बचाने के लिए कोई भी शख्स शिविर में आकर रक्तदान कर सकता है। एक यूनिट रक्त देने से दानवीर की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन थैलेसीमिया रोग से पीड़ित बच्चे, गर्भवती महिलाएं और सड़क दुर्घटना में घायल गंभीर लोगों के घरवालों के चेहरे पर मुस्कान अवश्य लाई जा सकती है।
जिला अस्पताल में रोजाना ऐसे लोग आते हैं, जिसमें से किसी को थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे के लिए रक्त की जरूरत होती है या फिर किसी को गर्भवती पत्नी के लिए। कोरोना काल के बाद से ब्लड बैंक में भी खून की कमी बनी हुई है। ऐसे में बच्चों के माता-पिता को लेकर गर्भवती महिलाओं के लिए खून का इंतजाम करना इनके परिजन के लिए चुनौती है। ऐसे में रक्त के अभाव में किसी के जीवन की डोर न टूटे इसलिए अमर उजाला फाउंडेशन हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस पर रक्तदान शिविर आयोजित करता है। इसका उद्देश्य जरूरतमंदों को खून उपलब्ध कराकर उनका जीवन बचाना है। रक्तदान शिविर सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक लगेगा।
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ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. केपी सिंह ने मुताबिक, एक यूनिट रक्तदान से किसी की जान बच सकती है। इस मूलमंत्र को अपनाते हुए हर किसी को परोपकार के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने बताया कि रक्तदान करने वालों की पांच अन्य प्रकार की गंभीर बीमारियों की जांचें मुफ्त में हो जाती हैं। इसमें एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, सी, एचआईवी आदि शामिल हैं। ब्लड बैंक प्रभारी ने 18 से 60 साल तक के स्वस्थ लोगों से शिविर में आकर रक्तदान कर महादानी बनने का आवाहन किया है। इन महादानियों को अमर उजाला फाउंडेशन प्रमाणपत्र देकर सम्मानित भी करेगा।

रक्तदान के फायदे
- रक्तदान से नई लाल रक्त कोशिकाएं बनती हैं।
- ये रक्त-प्रवाह को सामान्य बनाए रखता है।
- ब्लड प्रेशर की समस्या नहीं होती है।
- हृदय संबंधी बीमारियां होने का खतरा कम होता है।
- इससे कैंसर होने का खतरा कम होता है।

जिला अस्पताल में हर माह आते हैं थैलेसीमिया पीड़ित 10 से 15 बच्चे
लखीमपुर खीरी। थैलेसीमिया एक आनुवांशिक रक्त रोग है। इसके बारे में बच्चे के जन्म के तीन माह बाद पता चलता है। इस रोग के कारण बच्चों में रक्त की कमी होने लगती है। समय पर खून न मिलने पर उसकी मृत्यु तक हो सकती है। जिला अस्पताल में इससे पीड़ित 10 से 15 बच्चे हर माह आते हैं।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा बताते हैं कि हर सामान्य व्यक्ति के शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र करीब 120 दिन की होती है, लेकिन थैलेसीमिया पीड़ित में इनकी उम्र मात्र 20 दिन ही रह जाती है। इसका असर हीमोग्लोबिन पर पड़ता है। इससे बच्चा खून की कमी का शिकार हो जाता है, जिसे हर माह या फिर एक माह में दो बार तक खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। मगर, ब्लड बैंक में खून की कमी के चलते इस रोग से पीड़ित बच्चों को खून न मिलने से माता पिता परेशान होते हैं। ऐसे में ब्लड बैंक में रक्त की पर्याप्त उपलब्धता होने से थैलेसीमिया रोग से पीड़ित बच्चों को समय पर खून मुहैया कराकर उसकी जान बचाई जा सकती है। यहां बता दें कि मार्च 2021 से मार्च 2022 तक 91 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को ब्लड दिया जा चुका है।

ब्लड बैंक में इन रक्त समूह की है कमी
ब्लड ग्रुप- उपलब्धता
एक निगेटिव- शून्य
बी निगेटिव- पांच
एकबी निगेटिव- एक
ओ निगेटिव- छह
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