मैलानी। पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में भी अत्याधुनिक तकनीक प्लासर क्विक रिलेयिंग सिस्टम (पीआरक्यूएस) मशीन का प्रयोग होने लगा है। इससे चंद घंटों में रेल की पटरियां बदल दी जाती हैं। श्रमिकों के जरिये कई घंटों में होने वाला काम इस मशीन से सिर्फ चंद घंटों में ही हो जाता है। यह तकनीक पहले से अधिक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भी है।
पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में रेल यात्रियों, रेल संपत्ति की सुरक्षा और संरक्षित परिचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मंडल में स्टेशनों, यार्ड और रेल खंडों में रेल पटरियों का नियमित अनुरक्षण और समीक्षा की जाती है।
इसी परिप्रेक्ष्य में पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के सभी रेलखंडों पर एक आधुनिक सेमी-मेकेनाइज्ड सिस्टम स्वचालित मशीन पीक्यूआरएस का प्रयोग भी किया जाने लगा है। इसके उपयोग से कम समय में पुरानी रेल पटरियों को नई पटरियों में बदला जाने लगा है। विशेष उपकरणों का उपयोग करके स्लीपरों सहित पुराने रेल पैनलों को हटाकर उनकी जगह नए पैनल भी लगाए जाने लगे हैं।
पीक्यूआरएस में दो स्वचलित पोर्टल क्रेन होती हैं, जिनका उपयोग ट्रैक बदलने के लिए होता है। कार्य के दौरान क्रेनों को ट्रैक पर उतारा जाता है जो पुराने ट्रैक को उठाती हैं और पहले से एकत्र किए गए नए पैनलों को लगाती है।
पोर्टल क्रेन के पीछे टैंपिंग मशीन भी लगाई जाती है जो नए ट्रैक को उठाने और टैंपिंग का कार्य करती है। यह प्रक्रिया ट्रैक को तेजी से और उच्च गुणवत्ता के साथ नवीनीकृत करती है। इससे समय की बचत होती है और ट्रेनें सुचारू रूप से चलती हैं।
पहले श्रमिक करते थे रेल पटरी बदलने का काम
रेल पटरियों को बदलने का काम पहले गैंगमैन, ट्रैकमैन और श्रमिकों के जरिये होता था, जिसमें काफी समय लग जाता था। पीक्यूआरएस से कई घंटों में होने वाला यही काम अब चंद घंटों में ही होने लगा है और अधिक श्रमिकों की जरूरत भी नहीं पड़ती है। इससे अप्रैल माह में मसकनवां से लखपतनगर के बीच 3.40 किमी रेलपथ नवीनीकरण का काम किया गया है।
पूर्वोत्तर रेलवे, लखनऊ मंडल में रेल संरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट की दिशा में आधुनिक तकनीकी से युक्त पीक्यूआरएस मशीन से पुरानी रेल पटरियों के स्थान पर अधिक मजबूती के साथ नई रेल पटरियों को बिछाने का कार्य चल रहा है। सुरक्षित यात्रा के मद्देनजर रेल नवीनीकरण का कार्य मंडल के विभिन्न रेल खंडों पर किया जा रहा है।
- महेश गुप्ता, जनसंपर्क अधिकारी, पूर्वोत्तर रेलवे, लखनऊ