लखीमपुर खीरी। जिले में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जिला महिला अस्पताल में हुई जांच के दौरान दिसंबर में 50 गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित पाई गईं, जबकि जनवरी में यह संख्या 39 दर्ज की गई। संख्या में मामूली कमी के बावजूद समस्या की गंभीरता बरकरार है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में रक्त की आवश्यकता बढ़ जाती है। ऐसे में यदि पर्याप्त पोषण और आयरन नहीं मिल पाता तो खून की कमी हो जाती है। जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अमित कुमार ने बताया कि एनीमिया की स्थिति में महिलाओं को कमजोरी, चक्कर आना, अत्यधिक थकान और सांस फूलने जैसी दिक्कतें होती हैं। गंभीर मामलों में समय से पूर्व प्रसव, कम वजन के शिशु का जन्म और अन्य जटिलताएं भी सामने आ सकती हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि संतुलित आहार का अभाव, आयरन और फोलिक एसिड की गोलियों का नियमित सेवन न करना तथा जागरूकता की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या अधिक देखने को मिल रही है, जहां महिलाएं समय पर जांच और उपचार नहीं करा पातीं।
-इन बातों का रखें ध्यान-
स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और चिकित्सक की सलाह के अनुसार आयरन व फोलिक एसिड की दवाएं लें। हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, गुड़, चना और ताजे फल आहार में शामिल करने से एनीमिया की समस्या से काफी हद तक बचाव संभव है। किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी को नजरअंदाज न करते हुए तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है।