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Lakhimpur Kheri News: जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की सेहत पर अब होगी सीधी निगरानी

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जिला अस्पताल में मरीजों की सेहत की जानकारी लेते चिकित्सक। स्रोत : स्वास्थ्य विभाग
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लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में मरीजों के इलाज व सेहत की अब सीधी निगरानी होगी। मरीज की सेहत में अगर सुधार नहीं हो रहा है या फिर वार्ड में किसी मरीज की मौत होती है, तो उसके लिए संबंधित चिकित्सक से पूछताछ भी की जाएगी। अगर मामले में किसी चिकित्सक की लापरवाही सामने आएगी तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इसको लेकर मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य ने रूपरेखा तैयार कर ली है।
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दरअसल, बीते दिनों सड़क हादसे में एक महिला को जिला अस्पताल ले जाया गया था। जहां चिकित्सक की लापरवाही से महिला की मौत का आरोप लगा था। जांच में चिकित्सक व स्टाफ नर्स की लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई भी की गई थी। मामले की संजीदगी को देखते हुए जिला अस्पताल में अब मरीजों की निगरानी की जाएगी। इसको लेकर एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है।
चिकित्सक को वार्ड में सुबह-शाम राउंड के दौरान गंभीर भर्ती मरीजों की वीडियो बनाकर व्हाट्स एप ग्रुप पर अपलोड करनी होगी। चिकित्सक को बताना होगा कि भर्ती मरीज की हालत में कितना सुधार हो रहा है, कौन सी दवा दी जा रही है। यदि सुधार नहीं हो रहा तो क्यों नहीं हो रहा है। इसके अलावा यदि वार्ड में किसी मरीज की मौत होती है तो इलाज करने वाले संबंधित चिकित्सक से भी इसका कारण पूछा जाएगा।
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मरीजों की रिपोर्ट रात आठ से नौ बजे तक हर हाल में व्हाट्स एप ग्रुप पर अपलोड करनी होगी। यदि कोई चिकित्सक रिपोर्ट नहीं करता है तो उसका उस दिन का वेतन काट लिया जाएगा। इसको लेकर जिला अस्पताल के आर्थोपेडिक व सर्जरी मरीजों की निगरानी शुरू भी कर दी गई है। वहीं प्रत्येक शुक्रवार को जिला अस्पताल की तीसरी मंजिल पर बने हाल में चिकित्सक को प्रेजेंटेशन देना होगा। (संवाद)

गंभीर मरीजों की हुई मौत तो तय होगी जवाबदेही
जिला अस्पताल में गंभीर मरीज की अगर मौत होती है। इसके पीछे का कारण भी जाना जाएगा। मरीज की मौत क्यों हुई, क्या कारण था, इलाज में क्या कमिया रहीं। इसको लेकर जवाब तलब किया जाएगा। इसके अलावा डेथ ऑडिट व गंभीर मरीजों के इलाज के रिव्यू को लेकर हर शुक्रवार को जिला अस्पताल की तृतीय मंजिल पर बने हाल में प्रजेंटेशन देना होगा।

डेथ ऑडिट व गंभीर मरीजों के इलाज के रिव्यू को लेकर जिला अस्पताल में यह सुविधा शुरू की जा रही है। इससे मरीजों के इलाज की सीधी निगरानी होगी। यदि कोई चिकित्सक लापरवाही करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. वाणी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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