50 क्विंटल भूसा दान देने वाले व्यक्ति के घर जाएंगे डीएम-सीडीओ
गो आश्रय स्थलों के संचालन में बजट की कमी आ रही आड़े
लखीमपुर खीरी। पशुओं के लिए भूसे की कमी का संकट गहराता जा रहा है। वहीं गो आश्रय स्थलों के संचालन में बजट की समस्या आड़े आ रही है। इस कारण प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों से मदद मांगने का मन बनाया है। डीएम का कहना है कि जो दानी 50 क्विंटल से अधिक भूसा दान में देंगे, उनके दरवाजे भूसा मांगने मैं और सीडीओ स्वयं पहुंचेंगे।
जनपद में लावारिस पशुओं द्वारा खेतों में फसलें बरबाद करने और सड़कों पर घूमने के मामले थमे नहीं हैं। कुल 45 गो आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें करीब 12 हजार गोवंश संरक्षित किए गए हैं। संरक्षित पशुओं को चारा खिलाने के लिए प्रतिदिन प्रति पशु 30 रुपये बजट शासन से मिलता है, लेकिन इस नाममात्र की धनराशि से पशुओं को भरपेट चारा मुश्किल है। क्योंकि भूसा का रेट 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जबकि हरा चारा इससे भी महंगा है।
ऐसे में पशुओं को चारा उपलब्ध कराने के लिए डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने निशुल्क भूसा संरक्षित एवं संग्रहित करने का अनूठा प्रयोग किया है, जिसके लिए अफसरों को भूसा दान करने वाले व्यक्तियों/किसान के घर जाना होगा। वर्तमान समय में गेहूं की कटाई-मड़ाई का समय चल रहा है, जिससे भूसा एकत्र करने में आसानी होगी।
डीएम ने बताया कि खीरी जिले में यदि कोई समाजसेवी 50 क्विंटल भूसा गो-आश्रय स्थल के लिए दान करेगा, तो उस दान करने वाले व्यक्ति के घर डीएम एवं सीडीओ जाएंगे। वहीं यदि कोई व्यक्ति 30 क्विंटल भूसा दान देता है, तो उसके घर एडीएम जाएंगे। यदि कोई किसान 20 क्विंटल भूसा दान करता है, तो उसके घर संबंधित तहसील के एसडीएम जाएंगे। यदि कोई व्यक्ति 10 क्विंटल भूसा दान देता है, तो उसके घर बीडीओ व तहसीलदार जाएंगे। इस संबंध में सभी गो आश्रय स्थलों के संचालकों को अवगत कराया गया है, जो ऐसे भूसा दानियों से संपर्क कर इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को देंगे।