नेपाल बॉर्डर के थारू बाहुल्य छह गांवों में लगे मोबाइल टॉवर, तीन हुए शुरू
39 गांवों की 60 हजार आबादी इंटरनेट सुविधा से होगी लाभान्वित
लखीमपुर खीरी। नेपाल सीमा पर जंगल के अंदर बसे थारू जनजाति बाहुल्य गांवों में आजादी के बाद अब लोगों को मोबाइल नेटवर्क से जुड़ने की सुविधा मिलने जा रही है। इससे थारू जनजाति के बच्चे भी ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे। तीन गांवों- सेड़ाबेड़ा, बजाही और पोया में लगाए गए मोबाइल टॉवरों को परीक्षण के लिए शुरू कर दिया गया है। शेष तीन गांवों बनकटी, ढखिया और रामगढ़ में दस दिन बाद परीक्षण शुरू होगा।
पलिया ब्लॉक क्षेत्र में जंगल के अंदर थारू अनुसूचित जनजाति की 23 ग्राम पंचायतों में कुल 39 मजरा गांव हैं। इनकी कुल आबादी करीब 60 हजार है। वन क्षेत्र में प्रतिबंधों के कारण थारू जनजाति के लोग अब तक आधुनिक संचार सेवाओं जैसे इंटरनेट की सुविधा से वंचित थे। सिर्फ चंदनचौकी में बीएसएनएल का एक मोबाइल टॉवर लगा है, जिसकी रेंज तीन किलोमीटर है। जंगल क्षेत्र में फाइबर ऑप्टिकल लाइन बिछाने की अनुमति वन विभाग नहीं देता है, जिससे बीएसएनएल का टॉवर माइक्रोवेव सिस्टम से चल रहा है, लेकिन यह टॉवर ज्यादातर समय निष्क्रिय रहता है।
बेहतर कनेक्टिविटी न होने चंदनचौकी क्षेत्र में बैकिंग सुविधा का अभाव बना हुआ है। कोरोना काल में शिक्षा व्यवस्था भी ऑनलाइन हो गई है, जिससे थारू गांवों के बच्चे पिछड़ रहे थे। सभी मोबाइल टॉवरों को विधिवत चालू करने के लिए अभी 10 दिन का समय लग सकता है।
पलिया विधायक रोमी साहनी द्वारा उद्घाटन कराए जाने की चर्चा है। एकीकृत जनजाति विकास परियोजना चंदनचौकी के परियोजना अधिकारी यूके सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार की प्रत्येक गांव को इंटरनेट कनेक्टिविटी से जोड़ने की योजना के तहत रिलायंस जियो ने छह थारू बाहुुल्य गांवों में मोबाइल टॉवर स्थापित कर दिए हैं, जिनमें से तीन गांवों सेड़ाबेड़ा, बजाही और पोया में मंगलवार को टॉवरों को चालू करके परीक्षण किया जा रहा है। यह मोबाइल टॉवर सैटेलाइट के माध्यम से काम करेंगे। सभी छह टॉवरों के चालू होने पर 28 किलोमीटर एरिया इंटरनेट कनेक्टिविटी से आच्छादित हो जाएगा, जिससे 23 ग्राम पंचायतों के 39 मजरा गांवों के लोग लाभान्वित होंगे।