लखीमपुर खीरी। गर्मियों के समय हरे चारे का संकट हो जाता है। ऐसी दशा में पशुओं को भूसा या अन्य सूखा चारा ही नसीब होता है, लेकिन अब पशुओं को साल भर हरा चारा दिए जाने की व्यवस्था की जा रही है। पशुओं को अब साइलेज चारा दिया जाएगा। इसको अचार भी कहा जाता है। साइलेज चारा विशेष तकनीकी से तैयार किया जाता है।
सीवीओ डॉ. दिनेश कुमार सचान ने बताया कि साइलेज चारा आपूर्ति के लिए पांच कंपनियों ने टेंडर डाला था। कपिला पशु आहार कंपनी का टेंडर फाइनल हुआ है। यह कंपनी 7.27 रुपये प्रति किलो के हिसाब से साइलेज चारा उपलब्ध कराई जाएगी।
सीवीओ डॉ. दिनेश सचान ने बताया कि साइलेज एक पशु आहार है। इसमें हरे चारे और अनाज दोनों के गुण होते हैं। 15-20 फीसदी मक्के के दाने होते हैं। फाइबर और स्टार्च दोनों पाए जाते हैं। साथ ही प्रोटीन की मात्रा भी लगभग 8-10 प्रतिशत होती है। हरे चारे को लंबे समय तक संरक्षित करने की प्रक्रिया ही साइलेज है।
इसकी खास बात यह है कि साइलेज सालभर पशुओं को खिलाया जा सकता है। इसके सेवन से जानवरों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। साथ ही दूध का फैट बढ़ने से बाजार में अच्छी कीमत भी मिलती है।
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साइलेज चारा बनाने की विधि
साइलेज को गड्ढों में बनाया जाता है। जमीन के नीचे बनाए गए साइलेज अच्छे रहते हैं और आसानी से बन जाते हैं। किसानों के लिए इसे गड्ढे में तैयार करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। आठ फुट चौड़े और 12 फुट गहरे गड्ढे में पशुओं के लिए तीन महीने का चारा संरक्षित किया जा सकता है। साइलेज के लिए गड्ढे बनाए जाते हैं और इन गड्ढे की दीवारें धरातल से थोड़ी ऊपर उठी होनी चाहिए। ताकि बारिश का पानी गड्ढे में न जा सके।