प्रशासन ने भी दिखाई लापरवाही, खामियाजा भुगत रहे बाढ़ पीड़ित
डीएम ने एक और एसडीएम ने दो बार नोटिस देकर बाढ़ खंड शारदानगर को बंधे को मजबूत करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी बाढ़ खंड के अधिकारी नहीं चेते। प्रशासनिक अधिकारी भी गंभीर नहीं हुए। यदि प्रशासनिक अधिकारी बाढ़ पीड़ितों की मांग पर संजीदा हो जाते तो शायद यह हालात नहीं होते। सोमवार को जो कुछ हुआ वह लापरवाही का ही नतीजा था।
बता दें कि शारदा नदी से निकला घाघी नाला बहतिया नाले में आकर मिलता है। घाघी नाले से झौवापुरवा, पुरैना, खमरिया सहित कई गांव प्रभावित होते हैं। बरसात के समय यहां के हालात काफी खराब हो जाते थे। शारदा के उफनाने से घाघी नाला विकराल रूप ले लेता था। जिससे सैकड़ों गांव जलमग्न हो जाते थे और फसलें तबाह हो जाती थीं। प्रशासन की ओर से ध्यान न देने पर बाढ़ पीड़ितों ने तीन साल पहले श्रमदान कर रानीगंज के पास बंधा बनाया था। कई बार ग्रामीणों ने बंधे को मजबूत कराने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन हरकत में नहीं आया। सात जून को डीएम आकाशदीप समग्र लोहिया गांव खमरिया आए थे। वापस जाते समय ग्रामीणों ने उनका काफिला रोक लिया था और बंधे को मजबूत कराने की मांग की थी। जिस पर डीएम ने बाढ़ खंड को नोटिस देकर हफ्ते भर में काम चालू करने के निर्देश दिए थे। नियत समय पर जब काम चालू नहीं हुआ तो रानीगंज, लुधौरी सहित कई गांवों के ग्रामीण 15 और 18 जून को एसडीएम निघासन से मिले। एसडीएम ने भी दो नोटिस दीं, लेकिन इसका भी अफसरों पर कोई असर नहीं पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों ने नोटिस देने तक ही अपनी जिम्मेदारी समझी और नोटिस पर क्या कार्रवाई हुई? इसको भी जानने की जहमत नहीं उठाई। यदि प्रशासनिक अफसर बंधे को लेकर पहले से सतर्क हो जाते तो सैकड़ों गांवों को जलमग्न होने से बचाया जा सकता था और सैकड़ों एकड़ फसल भी बर्बाद होने से बच सकती थी।