जलस्तर भले ही घटा, लेकिन बाढ़ ग्रस्त गांवों में हालात जस के तस
शारदा नदी का उफान अब कम होने लगा है, जिससे नदी खतरे के निशान से अब महज 1.18 मीटर ऊपर ही रह गई है। जलस्तर भले ही घटा हो, लेकिन बाढ़ ग्रस्त गांवों को अभी राहत नहीं मिल पाई और उनमें पानी भरा हुआ है। इसके साथ ही इन गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी चलने के कारण आवागमन बंद है।
पहाड़ों पर हो रही बारिश से बनबसा बैराज द्वारा अतिरिक्त पानी की रिलीजिंग बढ़ा दी गई थी और इसके चलते नदी खतरे के निशान 153.620 सेमी को पार कर करीब एक मीटर 18 सेेमी ऊपर पहुंच गई थी और इससे नदी के आसपास के आजादनगर, बर्बादनगर, मटैहिया, खैराना, बोझवा, दौलतापुर, कचनारा, मटहिया, श्रीनगर, इमलिया फार्म, मेलाघाट, लगदाहन, पतवारा, संपूर्णानगर परिक्षेत्र के गोविंदनगर, संजय गांधी नगर, मझगईं परिक्षेत्र के नयापुरवा, खालेपुरवा आदि करीब एक दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। मंगलवार को नदी के जलस्तर में कमी आने लगी और वह घटकर खतरे के निशान से 1.18 मीटर ऊपर ही रह गई। लेकिन इससे बाढ़ प्रभावित गांवों को कोई राहत नहीं मिली है और हालात जस के तस हैं।
संपूर्णानगर परिक्षेत्र में जताया जा रहा सबसे ज्यादा खतरा
बताया जा रहा है कि बनबसा बैराज से रिलीजिंग बढ़ जाने से सबसे ज्यादा खतरा संपूर्णानगर क्षेत्र के नदी समीपवर्ती गांवों को है। फिलहाल प्रशासन ने यहां सभी को अलर्ट कर दिया है।
कटान भी जारी
मझगईं परिक्षेत्र के नयापुरवा और खालेपुरवा गांव में बाढ़ के साथ कटान भी जारी है। जिसमें अब तमाम जमीन नदी में समा चुकी है। यहां के ग्रामीणों को दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ में वह घरों में कैद हैं तो उधर उनकी जमीन भी जा रही है। वहीं दौलतापुर गांव में भी कृषि भूमि का कटान हो रहा है, हालांकि यहां कटान की गति धीमी है।
बनी हुई है चारे की किल्लत
इलाके के बाढ़ ग्रस्त गांवों में खेतीहर इलाका डूबा होने के कारण जानवरों के चारे की किल्लत पैदा हो गई थी जो मंगलवार को भी बनी रही। ग्रामीण मवेशियों के चारे को लेकर काफी चिंताग्रस्त हैं।