पशुओं को बीमारियों से बचाने के नाम पर हो रही औपचारिकता
पशुओं को खुरपका और मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाने के लिए बरसात के पूर्व किए जाने वाले टीकाकरण में विभाग ने औपचारिकता निभाई है। हालत ये है कि शहरी क्षेत्रों में कई मोहल्लों में टीकाकरण टीमें गई ही नहीं और विभाग सभी पशुओं के टीकाकरण का दावा कर रहा है।
जिले का अधिकतर हिस्सा बाढ़ प्रभावित है। इसमें पलिया, निघासन, धौरहरा और लखीमपुर तहसील क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में जलभराव होता है गंदा पानी महीनों भरा रहता है। बरसात में खुरपका और मुंहपका जैसी बीमारियों का प्रकोप रहता है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में लगभग 52,990 क्रास ब्रेड गोवंशीय पशु, 4,11,952 देशी गोवंशीय पशुओं के अलावा लगभग 5,25,069 महिषवंशीय पशु हैं। इनके अलावा अन्य पशु हैं। इन पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए प्रत्येक वर्ष अप्रैल से मई तक टीकाकरण किया जाता है। इस बार भी पशुपालन विभाग ने अप्रैल में पशुओं के टीकाकरण के लिए टीमें बनाईं। विभाग की कुछ टीमों ने ग्रामीणों क्षेत्रों में टीकाकरण का कार्य किया भी लेकिन शहरी क्षेत्रों में इसमें औपचारिकता निभाई गई। विभाग के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक टीकाकरण का कार्य पूरा हो गया है लेकिन सच्चाई यह है कि शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह टीकाकरण हुआ ही नहीं है। शहर के मोहल्ला गंगोत्री कॉलोनी निवासी चंद्रभाल और सत्येंद्र बहादुर सहित कई लोगों ने बताया कि पशुपालन विभाग की टीम पशुओं को टीका लगाने के लिए मोहल्ले में आई हीं नहीं। इससे पशुओं में बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
यदि कहीं छूटा है तो पूरा कराया जाएगा टीकाकरण
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.एसपी सिंह ने बताया गाय और भैंस यदि गर्भवती हैं तो उनका टीकाकरण नहीं किया जाता है उनका बच्चा गिरने का खतरा रहता है इसके अलावा गायों और भैंसों के जो बच्चे चार माह से कम के होते हैं उनका भी टीकाकरण नहीं किया जाता है। इसके अलावा यदि कोई पशु छूटा है तो पशुपालक उनको बता सकता है। जो पशु किसी कारण टीका लगने से छूट गए हैं वे लोग इसकी सूचना देकर पशुओं को टीका लगवा सकते हैं। इसका टीका पूरी तरह से नि:शुल्क है कोई फीस नही ली जाती है।