चौथे दिन थमा नोमैंस लैंड पर निर्माण का विवाद
दोनो देशों के अधिकारियों की बैठक हुई
नेपाली नगर पालिका बना रही थी हृयूम पाइप की पक्की पुलिया
भारत-नेपाल सीमा पर बसही गांव से सटे नोमैंस लैंड पर नेपाल की ओर से किए जा रहे पुलिया निर्माण से उपजा विवाद चार दिन बाद दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक के बाद थम गया। बैठक में सहमति बनी है कि सीमा का नवीन सर्वे जब तक नहीं होता नेपाल की ओर से नोमैस लैंड के दस गज के दायरे के बाहर नेपाली क्षेत्र में हृयूम पाइप डालकर कच्चा अस्थाई रास्ता बनाया जा सकता है। मामले को लेकर नेपाली नाराज थे और रोजाना अधिकारियों की बैठक हो रही थी।
बता दें कि 18 फरवरी को भारत नेपाल के बसही गांव से सटे नोमैंस लैंड पर नेपाली सीमावर्ती नगर पालिका कई हृयूम पाइप डालकर एक पुलिया बना रही थी। खबर मिली तो भारतीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने वहां पहुंचकर नापजोख की और निर्माण को नोमैंस लैंड के दस गज के दायरे में पाया। जिस पर निर्माण रुकवा दिया गया। नेपाली नगरपालिका की ओर से कहा गया कि यह जमीन उनके क्षेत्र में है और नोमैंस लैंड के दायरे से बाहर है। इसको लेकर गतिरोध शुरू हो गया और रोजाना भारतीय और नेपाली अधिकारियों की बैठक होने लगी, लेकिन निर्माण नहीं करने दिया गया। मंगलवार को एसडीएम शादाब असलम, एसएसबी कमांडेंट दिलबाग सिंह, सीओ जितेंद्र गिरी, एसओ धर्मेंद्र कुमार, नायब तहसीलदार धनश्याम भारती, नेपाल की ओर से नेपाल पुलिस एसपी प्रकाश चंद, एपीएफ से केएस धामी, सहायक सीपीओ प्रेम सिंह कंवर आदि समेत नेपाली नगर पालिका के लोग एकत्र हुए और वार्ता की। जिसमें भारतीय अधिकारियों ने कहा कि नोमैंस लैंड पर कोई निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। नेपालियों ने कहा कि यह जगह नोमैंस लैंड से बाहर नेपाल की है, तभी निर्माण हो रहा था। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि फौरी तौर पर की गई जांच में यह नोमैंस लैंड में आ रही है। फिर नेपालियों ने बरसात के दिनों में होने वाली समस्या बताई तो भारतीय अधिकारियों ने कहा कि जब तक नवीन सर्वे नहीं होता तब तक नेपाली नोमैंस लैंड के बाहर नेपाली क्षेत्र में हृयूम पाइप और मिट्टी डालकर रास्ते का निर्माण कर सकते हैं। इस पर सहमति बन गई और अधिकारी वापस आ गए।
क्यों होता है बार-बार विवाद
यह विवाद यहां पिछले साल भी उपजा था। उस दौरान भी भारतीय अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर निर्माण को रुकवा दिया था। एक बार फिर वहीं पर विवाद शुरू हुआ। यह विवाद क्यों होता है इस पर एक नजर डालते हैं। यहां नोमैंस लैंड पर लगा पिलर संख्या 200 बाढ़ में क्षतिग्रस्त होकर गायब हो गया था, तब से यहां एक पेड़ को पिलर संख्या 200 का रूप देकर उसकी नाप मानी जाती है। इस पेड़ के हिसाब से हो रहा निर्माण गलत दिख रहा है।
जल्द ही होने वाला है सर्वे
सर्वे ऑफ इंडिया जल्द ही यहां सीमा का सर्वे करने वाली है। बता दें कि सीमा पर कई पिलर क्षतिग्रस्त या गायब हो चुके हैं। बताया जा रहा है, इस समय सीमांकन चल रहा है और सर्वे ऑफ इंडिया की टीम रूपैडिहा तक पहुंच चुकी है और जल्द ही इस क्षेत्र में आ जाएगी। नाप के बाद ही आगे की कोई कार्रवाई होगी।
नेपाली क्यों बना रहे पुलिया
सीमा से सटे नेपाली यहां से सामान आदि खरीद कर ले जाते हैं। बरसात के दिनों में यहां पानी भर जाता है, इसलिए वह पुलिया का निर्माण अभी कर लेना चाहते हैं ताकि उनका आवागमन सुचारू रहे।
दोनों देश के अधिकारियों ने इस बात को माना है कि जब तक पिलर का निर्माण नहीं हो जाता है, तब तक किसी भी देश की तरफ से कोई भी निर्माण नहीं हो सकता है। नेपाल के नागरिकों की आवागमन की समस्या को देखते हुए जो पिलर संख्या 200 है उसको मानते हुए नोमैंस लैंड का दस गज का दायरा छोड़कर कच्चा रास्ता बनाया जा सकता है। वह सरकार से आग्रह करेंगे कि यहां के नागरिकों की समस्या को देखते हुए जल्द से जल्द यहां पिलर का निर्धारण करवाया जाए।
- दिलबाग सिंह, कमांडेंट एसएसबी
पिलर संख्या 200 माने जाने वाले पेड़ से निर्माण नोमैंस लैंड के दस गज के दायरे में आ रहा था, जिसे रुकवा दिया गया है। समस्या को देखते हुए नोमैंस लैंड के दस गज के दायरे के बाहर नेपाल में कच्चे अस्थाई रास्ते को बनाने की सहमति बनी है। आगे की कार्रवाई भारत सरकार के सीमांकन के बाद की जाएगी।
- शादाब असलम, एसडीएम, पलिया