क्षेत्र में बाढ़ से तबाह हुई फसलों के मुआवजे के रूप में किसानों के नाम बनी चेकों को बैंक में फर्जी खाता खुलवा कर हड़पने के मामले मेें बड़ी कार्रवाई हुई है। दलालों के बाद अब तत्कालीन तहसीलदार और लेखपाल भी पुलिस जांच में फंस गए हैं। इस घोटाले को ‘अमर उजाला’ ने कई खबरें प्रकाशित करके उजागर किया था। मामले की जांच एसडीएम निघासन कर रहे हैं। उन्हीं के निर्देश पर स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक ने दलालों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी।
पुलिस की जांच तहसील प्रशासन के गले की फांस बन गई है। जिन लेखपालों को एसडीएम अपनी जांच में बचाने का प्रयास कर रहे थे, पुलिस जांच में वही लेखपाल मुख्य दोषी पाए गए। इस मामले में पहले ही जेल जा चुके चार दलालों की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए अपर जिला जज ने तत्कालीन तहसीलदार और संबंधित लेखपालों को आरोपी बनाने का निर्देश पुलिस को दिए। इस पर विवेचना अधिकारी ने तत्कालीन तहसीलदार और लेखपाल को भी भी अभियुक्त बना दिया है।
ऐसे हुआ बाढ़ राहत घोटाला
वर्ष 2013-14 में आई भीषण बाढ़ से तबाह हुई फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए शासन से मुआवजा राशि आई थी। लेखपालों ने इसमें कई मृतकों के नाम चेक बना दिए। तमाम किसानों के चेक उन्हें देने की बजाय दलालों के हाथ बेच दिए गए। जिन्होंने फर्जी आईडी के जरिए बैंकों में लाभार्थी किसानों के नाम से फर्जी खाते खुलवा कर चेक का पैसा निकालकर हड़प लिया।
इस मामले में पहले ही चार लोग जा चुके हैं जेल
पुलिस जांच शुरू होने के बाद अब तक चार दलाल जेल जा चुके हैं। इन चारों की जमानत अब तक नहीं हो सकी है। बैंक में फर्जी खाता खोलने में इनकी सबसे अहम भूमिका रही है।
तहसीलदार ने भी दो लोगों को घोटाले का दोषी ठहराया
मौजूदा तहसीलदार जगदीश सिंह ने विवेचनाधिकारी को दिए गए लिखित बयान में बाढ़ राहत घोटाले में तत्कालीन तहसीलदार राम औतार और क्षेत्रीय लेखपाल छत्रपाल यादव को दोषी ठहराया है। इसी आधार पर इन दोनों को अभियुक्त बनाया गया है।