एचडीएफसी बैंक से किसानों को कृषि लोन की राशि तो मिली नहीं, लेकिन किस्त जमा करने के लिए फोन कॉल आ गई। इससे परेशान किसान, बैंक की शाखा में पहुंचे तो कृषि लोन की रकम में गोलमाल होने का खुलासा हुआ है। पता लगा कि उनके नाम से लोन स्वीकृत करके खाते में भेजी गई रकम ही निकाल ली गई। इस पूरे घालमेल में बैंक के एग्रीकल्चर सेल के अफसर अनिल वर्मा की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। वर्मा के गायब होने से संदेह और गहरा गया है। मामले की जांच बैंक मुख्यालय मुंबई से आई टीम कर रही है। पुलिस को भी तहरीर दी गई है। कुछ किसानों ने बैंक मैनेजर से लिखित शिकायत की है।
तहसील गोला के कंधरापुर गांव निवासी इंद्रजीत सिंह ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि वह जनवरी 2015 में एचडीएफसी बैंक शाखा गोला के प्रबंधक से कृषि लोन के लिए मिले थे। उन्हें एग्रीकल्चर सेल के अफसर अनिल वर्मा से मिलवाया गया था। अनिल ने उनकी फाइल तैयार करवाकर 5.31 लाख रुपये के कृषि लोन की मंजूरी के लिए भेजी। इसके बाद वह अनिल वर्मा से लेकर शाखा प्रबंधक तक चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें हर बार यही कहा जाता था कि ऋण स्वीकृत होते ही उनके पते पर चेक पहुंच जाएगा।
इंद्रजीत के मुताबिक वह बैंक में अंतिम बार मई के प्रथम सप्ताह में गए थे, फिर थक हारकर बैठ गए। सात जुलाई को बैंक से फोन आया कि वह अपने कर्जे की 41 हजार रुपये की किश्त जमा कर दें। इंद्रजीत सिंह ने जब कहा कि उन्हें कोई ऋण नहीं मिला है तो उधर से उनके नाम 5.31 लाख रुपये लोन होने की बात कही गई। यह सुनकर इंद्रजीत सिंह सन्न रह गए। इसके बाद वह कई किसानों के साथ बैंक पहुंचे और शाखा प्रबंधक को पूरी बात बताई। उधर, बैंक में पहले से ही कई ऐसे किसान मौजूद थे, जिन्हें बैंक से ऋण की किश्त जमा करने के लिए फोन गया था। इनमें से किसान जयराम सिंह, गुरुचरन सिंह, जगवीर सिंह, निशान सिंह और सुबेग सिंह ने भी बताया कि जनवरी से मार्च के बीच कृषि लोन के लिए फाइल तैयार कराई थी, पर उन्हें ऋण तो नहीं मिला, लेकिन उनके खाते से रकम जरूर निकल गई। सभी ने बैंक में लिखित शिकायत दी। इंद्रजीत सिंह ने कोतवाली पुलिस को तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने मामले की रिपोर्ट जांच के बाद दर्ज करने की बात कही।
शाखा प्रबंधक आलोक त्रिवेदी ने बताया कि किसानों के कृषि लोन की पहली
किस्त जमा करने के लिए सात जुलाई से फोन कराने शुरू किए गए थे। पहली किस्त
के लिए फोन कॉल की जानकारी बैंक की एग्रीकल्चर सेल के अफसर अनिल वर्मा को
भी थी। मामला बढ़ता देख शायद इसीलिए वह सात जुलाई से बिना बताए अनुपस्थित
हो गए। उसी दिन से उनका फोन बंद है, जिससे गोलमाल करने का शक उन्हीं पर
गहराता जा रहा है।
एचडीएफसी बैंक की एग्रीकल्चर सेल के क्लस्टर मैनेजर अमित शुक्ल ने बताया
कि ऋण खातों में गोलमाल को मुख्यालय ने गंभीरता से लिया है। बैंक की उच्च
स्तरीय टीम जांच कर रही है। जल्द ही पूरा मामला सामने आ जाएगा।
प्रभारी निरीक्षक, थाना गोला एके उपाध्याय ने बताया कि किसान इंद्रजीत
सिंह ने बैंक में गोलमाल की तहरीर उन्हें दी है, जिसकी मैं जांच कर रहा
हूं। फरार चल रहे अधिकारी अनिल वर्मा की भी तलाश की जा रही है।
फिलहाल इन किसानों ने की है शिकायत
नाम निवासी निकाला गया ऋण
1. जयराम सिंह कंधरापुर 5.31 लाख
2. गुरुचरन सिंह बसलीपुर 6.75 लाख
3. जगवीर सिंह बसलीपुर तीन लाख
4. निशान सिंह फूलबेहड़ 3.05 लाख
5. सुबेग सिंह रहीमनगर ग्रंट 4.45 लाख