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तिकुनिया कांड में नया मोड़, दोबारा पूछताछ के लिए कोर्ट ने दी मंजूरी

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तिकुनिया हिंसा के आरोपी आशीष मिश्रा मोनू को पेशी पर ले जाती पुलिस। संवाद
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आशीष मिश्र समेत अंकित दास, गनर लतीफ व ड्राइवर शेखर से अब पुुलिस दो दिन तक कर सकेगी पूछताछ
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लखीमपुर खीरी। तिकुनिया कांड में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। शुक्रवार को सीजेएम कोर्ट ने मुख्य आरोपी आशीष मिश्र समेत सहआरोपी अंकित दास, गनर लतीफ उर्फ काले व ड्राइवर शेखर भारती को पुलिस कस्टडी में पूछताछ के लिए 48 घंटे का पुलिस कस्टडी रिमांड आज दे दिया है। अब पुलिस 24 अक्टूबर की शाम पांच बजे तक इन चारों आरोपियों से पूछताछ कर सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद हरकत में आई जांच टीम ने बृहस्पतिवार को सीजेएम की अदालत में पुलिस कस्टडी रिमांड की अर्जी देते हुए आशीष मिश्र मोनू, अंकित दास व लतीफ उर्फ काले के साथ ही ड्राइवर शेखर भारती की तीन दिनों के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड की अर्जी दी थी, जिसके चलते बृहस्पतिवार को यह चारों आरोपी अदालत में पेश किए गए, जहां एसपीओ एसपी यादव ने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए बताया कि, प्रथम रिमांड के 14 दिनों के भीतर अभियोजन को जरूरत पड़ने पर मुलजिम को कस्टडी रिमांड पूछताछ के लिए अधिकार प्राप्त है।
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बचाव पक्ष से अभियुक्त आशीष मिश्र मोनू की ओर से अवधेश सिंह, अभियुक्त लतीफ उर्फ काले, अंकित दास और शेखर भारती की ओर से शैलेंद्र सिंह गौड़ ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। कहा कि अभियोजन की ओर से जो अर्जी दी गई है वह कानूनन त्रुटिपूर्ण है। अगर पुलिस को सुमित जायसवाल, नंदन सिंह, सत्यम त्रिपाठी को आशीष मिश्र मोनू, अंकित दास, शेखर भारती के साथ आमने-सामने पूछताछ करनी है तो इसके लिए कस्टडी रिमांड की कोई जरूरत नहीं है। सभी आरोपी जिला जेल में हैं, विवेचक वहीं जाकर पूछताछ कर सकते हैं। मुख्य रूप से तीन दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड को गैरजरूरी बताते हुए बचाव पक्ष की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई।
सीजेएम चिंताराम ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कस्टडी रिमांड अर्जी पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। शाम 4:00 बजे अदालत में कई शर्तें लगाते हुए 24 अक्टूबर की शाम पांच बजे तक इन चारों आरोपियों को पुलिस कस्टडी में लेकर पूछताछ करने को मंजूरी दे दी गई। हिदायत दी गई है कि चारों आरोपियों से पूछताछ के दौरान हिंसा नहीं की जाएगी और मेडिकल कराने के बाद भी विवेचक को जिला जेल से मुलजिम पूछताछ के लिए मिलेंगे। जिन्हें मेडिकल कराने के बाद ही दाखिल किया जाएगा। अदालती आदेश पाने के बाद ही जांच टीम के विवेचक विद्याराम दिवाकर जेल पहुंचकर चारों आरोपियों को अपने कब्जे में ले लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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शुरू हुए गवाहों के कलम बंद बयान
जांच टीम की ओर से तिकुनिया कांड में किसी तरह की ढील देने के मूड में पुलिस नहीं है। यही कारण है कि बृहस्पतिवार और शुक्रवार को मिलाकर पुलिस ने किसान व पीड़ित परिजनों को मिलाकर करीब 14 व्यक्तियों के 164 के तहत कलम बंद बयान कराने के लिये अदालत में अर्जी दाखिल की है। जिस पर सीजेएम चिंताराम ने विभिन्न न्यायिक अधिकारियों को अलग-अलग गवाहों के बयान दर्ज कराने के लिए आदेशित किया है।
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