बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल में नेपाली हाथियों ने दस्तक दे दी है। अभी पांच टस्कर देखे गए हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि 24 घंटे के अंदर एक बड़ा झुंड यहां आ सकता है।
हर साल गणेश चतुर्थी से कुछ पहले हाथियों के एक-दो झुंड नेपाल के शुक्लाफांटा नेशनल पार्क से निकलकर शारदा नदी पार कर यहां आते हैं। उनकी वापसी दिवाली से पहले हो जाती है। पहले हाथियों के मुखिया टस्कर यहां आकर हालात का जायजा लेते हैं। उनका संकेत मिलने के बाद हाथियों के एक या दो झुंड यहां आते हैं।
इस बार नेपाली हाथियों का आगमन कुछ देरी से हो रहा है। इसके पीछे खीरी में पिछले महीने आई बाढ़ को माना जा रहा है। नेपाल के शुक्लाफांटा नेशनल पार्क से यह पांच टस्कर दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की संपूर्णानगर जंगल से पीलीभीत टाइगर रिजर्व की हरीपुर रेंज होते हुए भीरा रेंज की महराज नगर बीट से किशनपुर अभयारण्य और मैलानी रेंज के मड़हा जंगल में पहुंचे हैं।
माना जा रहा है कि इन टस्करों ने अपने साथियों को संकेत भेजकर यहां आने की हरी झंडी दे दी है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि 24 घंटे के अंदर यह हाथी दुधवा के जंगलों में पहुंच सकते हैं।
किसानों की उड़ी नींद
-दुधवा के जंगलों में नेपाली हाथियों के आगमन से क्षेत्रीय किसानों की नींद उड़ गई है। किशनपुर अभ्यारण्य की मैलानी रेंज जंगल से सटे गांवों पहाड़नगर, महोलिया, जटपुरा, खंजनपुर, नरगढ़ी, ग्रंट नंबर तीन आदि में बसे किसानों का कहना है कि इन दिनों हर साल नेपाल से आने वाले हाथियों का झुंड खेतों में खड़ी धान, गन्ना और केले की फसल रौंदकर बर्बाद करते हैं। ग्रामीण को रात-रात भर जागकर फसलों की रखवाली करनी पड़ती है। हाथियों के आने से उनका सुकून छिन गया है और नींद उड़ गई है।
वर्जन
पांच टस्कर हाथी मड़हा जंगल में देखे गए हैं। यह नेपाली हाथियों के दुधवा आने का संकेत है। दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इसके लिए जरूरी तैयारी शुरू कर दी है। वन कर्मियों की टीम गठित की गई है। टीम को 24 घंटे में बारी-बारी से हाथियों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
- डाॅ. एच राजामोहन, एफडी,दुधवा टाइगर रिजर्व