गोला के त्रिलोक गिरी सम्मेलन विद्यालय में चटाई पर बैठकर पढ़ते विद्यार्थी।
लखीमपुर खीरी। गिरते पारे में जहां आम जनजीवन बेहाल है, वहीं छोटे-छोटे बच्चे बिना स्वेटर स्कूल जाने के लिए मजबूर हैं। इतना ही नहीं स्कूल में इन्हें बैठाने के लिए मेज-कुर्सी तक नहीं है। ये बच्चे भीषण सर्दी में भी जमीन पर बैठकर अपना भविष्य बुन रहे हैं और जिम्मेदार महज ये कहकर अपनी जिम्मेदारी निभा ले रहे हैं कि प्रस्ताव भेजा गया है।
जिले में 3106 परिषदीय स्कूल संचालित हो रहे हैं। शिक्षा विभाग इन बच्चों के लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त होने की बात कहता है मगर असलियत यह है कि स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं तक का अकाल है। जिले के करीब 50 हजार बच्चों को अब तक स्वेटर तक नहीं मिल सका है। भीषण ठंड में जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर बच्चों के बीमार होने का खतरा लगातार बना रहता है। शुक्रवार को स्कूलों की पड़ताल कराई गई तो शहर के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय नौरंगाबाद के अलावा मिश्राना सहित कई स्कूलों में बच्चे बोरी और टाट पटि्टयों पर बैठे दिखाई दिए।
ग्रामीण अंचलों वाले स्कूलों में भी कुछ इसी तरह का माहौल देखने को मिला। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जहां-जहां भी इस तरह की दिक्कतें संज्ञान में आती हैं, उन्हें पूरा कराया जाता है। नकहा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय गड़ौसा में 200 बच्चे पंजीकृत हैं, इनमें से केवल 110 बच्चे ही स्कूल आये थे। फर्श पर दरी, टाट बिछाकर बच्चे बैठकर पढ़ते है।
स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए बेंच न होने की जानकारी है। सभी से प्रस्ताव मांगकर शासन को भेजा गया है। बहुत ही जल्द बेंच आदि पहुंचवा कर स्कूलों में इस समस्या को समाप्त किया जाएगा।
प्रवीण कुमार तिवारी, बीएसए
गोला के त्रिलोक गिरी सम्मेलन विद्यालय में चटाई पर बैठकर पढ़ते विद्यार्थी।
गोला के त्रिलोक गिरी सम्मेलन विद्यालय में चटाई पर बैठकर पढ़ते विद्यार्थी।