लखीमपुर खीरी। जिले में मीट की अधिकांश दुकानें बिना पंजीकरण चल रही हैं। इस ओर न तो विभागीय अफसरों का ध्यान है और न ही पुलिस-प्रशासन का।
विभाग में मात्र 138 मीट की दुकानों का पंजीकरण और लाइसेंस हैं, जबकि 100 से अधिक दुकानें तो लखीमपुर शहर के पांच किलो मीटर के दायरे में ही हैं। पूरे जिले की बात करें तो एक हजार से अधिक मीट की दुकानें संचालित हैं। जिन पर कार्रवाई तो दूर आज तक जांच करने की जरूरत नहीं समझी गई।
जिले की सात तहसील, 15 ब्लॉक, चार नगर पालिका और आठ नगर पंचायत की कुल 40 लाख से अधिक आबादी हैं। जिसमें लगभग 60 प्रतिशत से अधिक लोग मीट का सेवन करते हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग के सूत्रों ने बताया कि जिन मीट की दुकानों के लाइसेंस जारी हैं, वह सिर्फ भैंस के मीट के हैं। चिकन, मटन की दुकानें बिना पंजीकरण संचालित हैं।
विभागीय अफसरों से जानकारी की तो उन्होंने कहा उनके यहां से मीट के लाइसेंस जारी होते हैं, लेकिन यह बता पाना मुश्किल हैं कि कौन सा लाइसेंस किसके लिए है। इधर, अफसरों की अनदेखी से जिले में मीट का कारोबार दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है।
यही वजह है कि हर क्षेत्र में मीट की दुकानें खुलती जा रही हैं। जबकि मीट की दुकानों को खोलने की लंबी प्रक्रिया है।