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दुधवा में वन्यजीवों और जंगल की निगरानी अब होगी तेज

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पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क के सभी वन्यजीवों और जंगल की निगरानी के लिए 2018 से चल रही एप एम-स्ट्राइप्स से और बेहतर परिणाम लेने के लिए दुधवा में वनकर्मियों से संवाद किया गया।
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कार्यशाला में पार्क के एफडी संजय पाठक ने सभी अधिकारियों को पैदल गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही एप के जरिये बताया कि जंगल में वन्यजीवों की क्या स्थिति है। कहा कि इस तकनीक से गश्त बेहतर और पारदर्शी होती है। इसके अलावा एप के संचालन में आ रही दिक्कतों और उनके निराकरण के लिए सुझाव व भविष्य की रणनीति पर चर्चा की गई।
कार्यशाला में डीडी दुधवा मनोज सोनकर, डीडी बफर जोन डॉ. अनिल कुमार पटेल, वार्डेन करतनिया घाट यशवंत, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ समन्वयक डॉ. मुदित गुप्ता, वार्डेन किशनपुर तौफीक अहमद, वार्डेन दुधवा शशिकांत अमरेश, बेलरायां डॉ. सीपी सिंह, दिलीप श्रीवास्तव, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी पीलीभीत नरेश कुमार, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी लखीमपुर दबीर हसन, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी समुदाय चंदन मिश्रा, राजेंद्र कुमार, राहुल कुमार समेत सभी रेंज के अधिकारी मौजूद रहे।
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इस एप के जरिए कई टाइगर रिजर्व में हो रही गश्त
एम स्ट्राइप्स पद्धति से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के निर्देश पर देश के कई टाइगर रिजर्व में गश्त हो रही है। इसमें दुधवा टाइगर रिजर्व प्रमुख है। इस एप का संचालन दुधवा में करीब जुलाई वर्ष 2018 में शुरू हुआ था। यह खुद एक ट्रैकिंग सिस्टम एप है, जिसके पास यह फोन होगा उसकी लोकेशन का पता चलता रहेगा। इसमें फोन रखने वाले कर्मी को जंगल के किसी भी जीव की असामान्य गतिविधि को चित्र, चिन्ह आदि से एप में दर्ज करना होगा। इसके साथ ही जंगल में अवैध मानव गतिविधियां, कटान आदि से संबंधित कुछ अप्रत्याशित दिखाई देने पर भी उसको एप में दाखिल किया जाता है। ताकि आगे उच्चाधिकारी इसे जान सकें और फौरन ही उस पर जरूरी कार्रवाई की जा सके।
बाघ मित्र और वनकर्मियों को दिया वन्य जंतु संरक्षण का प्रशिक्षण
ममरी। महेशपुर रेंज कोठी कैंपस में डीएफओ समीर कुमार के निर्देशन में लगे प्रशिक्षण शिविर में वन कर्मियों को मोबाइल एप से गश्त करने, संदिग्ध लोगों की पहचान करने का प्रशिक्षण दिया गया।
शिविर में वनकर्मियों और बाघ मित्रों से डीएफओ समीर कुमार ने कहा कि वनकर्मी टोली बनाकर अपनी बीट के जंगल और बाघ प्रभावित क्षेत्र में जाएं, साथ ही मोबाइल एप से गश्त कर उसकी त्वरित सूचना अधिकारियों को दें। संदिग्ध व्यक्ति के दिखने पर एसटीपीएफ जवानों का सहयोग लेकर जंगल में घुसने का कारण पूछें।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने गश्त करते वक्त वन्य जीवो पर नजर रखने को कहा। उन्होंने बाघ मित्रों को गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को वन्यजीवों के स्वभाव और उनकी पहचान के बारे में जानकारी देने का प्रशिक्षण दिया। एसडीओ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ नरेश कुमार ने गश्त की ट्रेनिंग दी। एसटीआरआईपी के तहत दो घंटे चले प्रशिक्षण शिविर में रेंजर मोबीन आरिफ, रेंजर गोला बनारसीदास शाक्य आदि वनकर्मी, बाघमित्र मौजूद रहे। संवाद
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