जिला अस्पताल में मरीज को एक्सासाइल कराते हुए फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. विवेक तिवारी। स्रोत डॉक्टर
लखीमपुर खीरी। गर्दन झुकाकर और लेटकर लंबे समय तक मोबाइल व टीबी देखना सर्वाइकल की समस्या बढ़ा रहा है। सर्वाइकल का दर्द बड़ों में ही नहीं, बल्कि 10 से 17 वर्ष के तक किशोरों में भी तेजी से बढ़ रहा है। जिला अस्पताल में पिछले एक साल में इस तरह के मरीजों की संख्या बढ़ी है। मोबाइल व टीबी की वजह से सर्वाइकल वाले मरीज हफ्ते में एक या दो पहुंचते हैं।
डॉक्टर मरीजों को दवाएं देने के साथ ही उनको सर्वाइकल से बचाने के लिए कुछ व्यायाम भी कराते हैं। मोबाइल से दूरी बनाने के सलाह देते हैं। जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. विवेक तिवारी ने बताया कि बड़ों के साथ ही छोटे बच्चे भी सर्वाइकल दर्द की समस्या से ग्रसित मरीज आते हैं। ओपीडी में जब उनसे उनकी दिनचर्या के बारे में पूछते हैं तो अधिकांश मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करना सामने आता है।
करीब तीन माह पहले एक 10 वर्ष का बच्चा आया था, जिनको काफी तकलीफ थीं। उसके पिता ने बताया कि उसका बेटा लेटकर घंटों मोबाइल देखता है। 20 दिन पहले गर्दन में दर्द उठा तो पास ही एक अस्पताल से दवा दिलाई। दवा खाने तक आराम रहा, लेकिन बाद में तकलीफ बढ़ गई। बाद में पता चला कि सर्वाइकल हो गया है।
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. विवेक तिवारी ने बताया कि नकहा का एक 17 वर्ष का किशोर आया था, जिसको सर्वाइकल के साथ ही हाथ भी सुन्न हो चुका था। वह भी लेटकर लंबे समय तक मोबाइल देखता था। हालांकि दवाएं और कुछ व्यायाम की मदद से अब उसको आराम मिल रहा है।
इसके अलावा जनपद सीतापुर के हरगांव का 13 वर्ष का एक बच्चा आया था। जिसको सर्वाइकल की दिक्कते थीं। वह चारपाई पर लेटकर मोबाइल देखता था। चारपाई पर लेटकर मोबाइल देखना सबसे ज्यादा घातक होता है।
सिंकदराबाद का 19 वर्ष का एक छात्र को सर्वाइकल की समस्या थी। उसको पीठ की तरफ दर्द था। मोबाइल पर ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से उनको यह तकलीफ हुई है। इसी तरह तमाम प्रकार के दर्द के मामले आते है। सभी मरीजों को दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए एक्सासाइज कराते हैं। आदतों को बदलने के लिए प्रेरित करते हैं।