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अनाज की गठरी सिर पर लेकर पैदल ही व्यवहार करने जाते थे विधायक दुर्गा प्रसाद चौधरी

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फाइल फोटो- दुर्गा प्रसाद चौधरी। - फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज। मौजूदा स्थित में आर्थिक रूप से कमजोर या सामान्य व्यक्ति का चुनाव लड़ पाना बेहद मुश्किल है, लेकिन आजादी के बाद 20-25 वर्षों तक ऐसा नहीं था। कोई भी व्यक्ति जो समाज सेवा और आम जनता से जुड़ा हो वह चुनाव में हिस्सा लेकर अपना भाग्य आजमा सकता था। बांकेगंज विधानसभा क्षेत्र से 1969 में जनसंघ के टिकट विधायक बने कस्बा से सटे निपनियां गांव निवासी दुर्गा प्रसाद चौधरी भी ऐसे ही नेता थे।
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विधायक बनने से पहले और बाद भी वह कच्चे घर में ही रहे। चौपहिया वाहन तो दूर साइकिल तक नहीं खरीद पाए। दुर्गा प्रसाद चौधरी की पत्नी कमला देवी भी पति के विधायक बनने के पहले और बाद में भी घर-गृहस्थी के सारे काम काज अपने हाथों से ही करतीं थी। दुर्गा प्रसाद चौधरी के पांच पुत्रों में मौजूद दो पुत्र शिव सागर लाल और सुशील कुमार बताते हैं कि विधायक बनने के बावजूद वह हमेशा पैदल ही चलते रहे।
क्षेत्र में कहीं भी उन्हें शादी-विवाह का निमंत्रण मिलता तो वह घर से चार पसेरी अनाज की गठरी बना लेते और सिर पर लादकर जिसके यहां बेटी की शादी होती वह पहुंच जाते और उनके लायक जो काम होता वह काम करने के बाद ही अपने घर लौटते। शादी-विवाह के दौरान मेहमानों के जूठे पत्तल उठाते थे। विधायक होने के बावजूद ट्रेन में प्रथम श्रेणी के डिब्बे में यात्रा नहीं की, बल्कि हमेशा साधारण डिब्बे में बैठकर लखनऊ तक का सफर तय किया। हाथों में झाड़ू लेकर खुद घर के बाहर सफाई कर डालते थे। चाय की जगह हमेशा राब का शर्बत पीते थे।
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वर्ष 1969 में हुए विधानसभा चुनाव में दुर्गा प्रसाद चौधरी बांकेगंज विधानसभा क्षेत्र से जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़े और कांग्रेस प्रत्याशी छेदालाल चौधरी को 9599 वोटों से हराकर विधायक बने। विधायक बनने से पहले भी वह निर्धन थे, विधायक बनने पर और उसके बाद भी वह निर्धन ही रहे। उन्होंने यह चुनाव जनसंघ पार्टी और कार्यकर्ताओं की मदद से लड़ा था। विधायक दुर्गा प्रसाद चौधरी की सदगी की मिसाल लोग आज भी देते हैं।
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