मंगलवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे घर के बाहर खेल रही मोहल्ला गोटैया बाग निवासी अन्ना की डेढ़ वर्षीय पुत्री खुशबू उर्फ माही करीब तीन फिट गहरी चौड़ी नाली में गिर गई, जिससे उसकी उसमें डूबकर मौत हो गई। घटना से उसके परिवार में कोहराम मच गया। परिवार वालों ने पुलिस को सूचना दिए बगैर शव का अंतिम संस्कार कर लिया है।
मोहल्ला गोटैया बाद निवासी अन्ना काफी गरीब है। वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ पुराने जर्जर छोटे से मकान में रहता था। अन्ना ने बताया कि वह गोला रोड स्थित रेलवे क्रॉसिंग के पास स्थित एक होटल पर मजदूरी करता था। रोज की तरह मंगलवार की सुबह भी वह मजदूरी करने चला गया। घर पर उसकी पत्नी सीमा और डेढ़ वर्षीय पुत्री खुशबू ही थी। मंगलवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे पत्नी कमरे में घरेलू काम करने लगीं। इसी बीच बेटी माही खेलते-खेलते घर के बाहर आ गई और वह पास से निकले नाले में गिरकर डूब गई। करीब आधे घंटे तक जब पुत्री नहीं दिखी तो मां सीमा ने उसकी खोजबीन की, तो देखा कि बच्ची का शव नाले में पड़ा था। वह मौके पर ही चीखने-चिल्लाने लगी। इस पर मौके पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई।
सूचना पर पिता अन्ना भी मौके पर पहुंच गया। पुत्री का शव देख वह बिलख पड़ा। परिवार के लोगों ने मामले की सूचना पुलिस को नहीं दी और शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
कुआं पर भी नहीं पड़ा है जाल
तीन फिट गहरी नाली में जिस स्थान पर डूबकर खुशबू उर्फ माही की मौत हुई उसी के पास एक प्राइवेट स्कूल भी चल रहा है। स्कूल प्रबंधन ने नाली पर पत्थर डलवा रखे हैं, लेकिन स्कूल के पास ही जो कुंआ है उस पर जाल न पड़ा होने से अक्सर ही दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
खुले नाले और नालियां बन रहीं मुसीबत
शहर में कई ऐसे नाले और नालियां हैं, जिन पर पत्थर नहीं डाले गए हैं, जिससे हमेशा ही दुर्घटनाओं का भय बना रहता है। गोटैया बाग में हुए हादसे के बाद नगरपालिका की साफ-सफाई व्यवस्था की भी पोल खुल गई, जिस तीन फिट गहरी नाली में बच्ची की डूबकर मौत हुई। वह कूड़े और कचरे से बजबजा रही है। साफ-सफाई न होने के कारण नाली का पानी सड़कों पर भी भर रहा है, लेकिन शिकायतों के बाद भी नगरपालिका ने कोई सुधि नहीं ली। मोहल्ले वालों ने बताया कि कई बार नाली पर पत्थर डलवाने की मांग की गई, जिसे नगर पालिका प्रशासन ने अनसुना कर दिया। उनका कहना है कि यदि पत्थर नाली पर पड़ा होता तो मासूम बच्ची की मौत नहीं होती।
घटना दुखद है। गहरे नाले और नालियों पर पत्थर डलवाकर उन्हें ढकवाया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो।
- निरुपमा वाजपेयी, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद