नहीं मिल पा रहा लोगों को स्वच्छ पेयजल
जिम्मेदारी से कतरा रहीं ग्राम पंचायतें और अफसर
गर्मियों में भूगर्भ जलस्तर में कमी आने के साथ ही स्वच्छ पेयजल की मांग भी बढ़ जाती है, जिसे पूरा करने के लिए करोड़ों की लागत से पाइप पेयजल परियोजनाएं स्थापित की गई हैं। जिम्मेदार अधिकारियों और ग्राम पंचायतों की लापरवाही की वजह से इनका सफल संचालन नहीं हो पा रहा है। कई जगहों पर ओवरहेड टैंक बनाने के बाद अधूरा काम छोड़ दिया गया है। तो कुछ जगहों पर घटिया सामग्री प्रयोग किए जाने से परियोजना ही ठप है। कुल मिलाकर पेयजल परियोजना छलावा साबित हो रही है।
जिले में कुल 149 ओवरहेड टैंक पाइप पेयजल परियोजनाएं स्वीकृत हो चुकी हैं, जिनमें 76 निर्माणाधीन हैं। जबकि 34 परियोजनाओं का संचालन जल निगम और 39 परियोजनाओं का संचालन एवं रख-रखाव ग्राम पंचायतों के जिम्मे है। करोड़ों की लागत से बनने वाली पाइप पेयजल परियोजनाओं से ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल संकट पूरी तरह खत्म करने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसी सफलता मिली नहीं है। इनमें रमियाबेहड़ की तेलियार, धौरहरा के कलुआपुर और पसगवां ब्लाक के मैगलगंज स्थित परियोजनाएं कहने को आंशिक तौर पर संचालित हैं। शेष 70 परियोजनाएं पूरी तरह से चालू होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन स्थिति इसके उलट है। अधिकांश परियोजनाओं में आपरेटरों की तैनाती नहीं हो सकी है। तो ग्राम पंचायतें इनके संचालन और रख-रखाव पर ध्यान नहीं दे रहीं हैं। धौरहरा क्षेत्र के गांव करौंहा में निर्माणाधीन ओवरहेड टैंक में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। करौंहा निवासी धर्मेंद्र तिवारी ने डीएम को दिए शिकायती पत्र के माध्यम से आरोप लगाया है परियोजना के निर्माण में अनियमितता की गई है। सीढ़ियों पर सुरक्षा रेलिंग नहीं बनाई गई है, जिससे कभी भी हादसा हो सकता है। टैंक का रंगरोगन भी नहीं कराया गया है और अधूरा काम छोड़कर ठेकेदार चला गया है। इसी तरह मोहम्मदी के नरहरा गांव निवासी प्रताप चंद्र वर्मा ने भी पाइप खराब होने की शिकायत की है।
तिकुनियां। कस्बे में पीने के पानी को लेकर भारी संकट बना हुआ है। यहां बनी पानी की टंकी भी लोगों के लिए शोपीस बनकर रह गई है। इसके चलते कस्बावासी टंकी होते हुए भी पानी को तरस रहे हैं। रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस स्टैंड, प्राइवेट बस स्टैंड और पीएचसी तिकुनियां में पानी का घोर संकट है। कस्बावासियों ने कई बार शिकायतें भी कीं, लेकिन समस्या का निदान नहीं हो सका।
कस्बे में तीन महीने पहले पानी की टंकी बनकर तैयार हुई, जिसे जल निगम ने चालूकर पाइप की लीकेज की जांच का काम शुरू किया। तीन महीने से एक-दो घंटे टंकी चालू कर पाइप लाइन की जांच की जा रही है। उधर करीब 15 हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायत में कुल 620 घरों को कनेक्शन दिए गए हैं। इसके चलते तमाम लोग कनेक्शन पाने से वंचित रह गए हैं। वहीं जिनके कनेक्शन हैं भी उन्हें पानी की सप्लाई नहीं मिल पा रही है। नगर के कवि एवं व्यापारी सहजराम जायसवाल ने बताया कि पानी की टंकी बीरबल की खिचड़ी हो गई है। पांच सालों से लोग आस लगाए हैं, कि इस सीजन में पानी मिल जाएगा। कपड़ा व्यापारी संजय गुप्ता ने कहा कि पूरी पंचायत में केवल 620 लोगों को कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि काफी लोगों को सुविधा का लाभ नहीं मिल सका है। निर्मल गुप्ता ने कहा कि लगता है इस बार भी पीने के पानी पर ग्रहण लग जाएगा। किराना व्यापारी अनिल महावर ने कहा कि शीघ्र व्यापारियों का प्रतिनिधि मंडल डीएम से मिलकर विभागीय अधिकारियों की घोर लापरवाही की पोल खोलेगा। पानी की टंकी में लीकेज की समस्या से कभी नियमित पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
पेयजल समस्या के त्वरित निदान के लिए कंट्रोल रूम में शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। ब्लाक मुख्यालयों पर भी शीघ्र कंट्रोल रूम काम करना शुरू कर देंगे। प्राप्त शिकायतों के आधार पर पेयजल की समस्या को 48 घंटे के अंदर दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
अनिल कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी