लखीमपुर खीरी। कम छात्र संख्या वाले परिषदीय स्कूलों के विलय ने विद्यािर्थयों की विद्यालय से दूरी बढ़ा दी है। अभिभावक दूसरे स्कूलों में अपने बच्चों को भेजने से परहेज कर रहे हैं। किसी में हादसों के कारण डर है तो कहीं खेतों के बीच रास्ते को लेकर जंगली जानवरों का खतरा बना हुआ है।
बीते दिनों शिक्षा विभाग की ओर 23 स्कूलों के समायोजित होने की सूची जारी की गई थी। इसकी जानकारी मिलते ही शिक्षकों के साथ ही अभिभावक भी परेशान हैं। शिक्षक संगठन इसके विरोध में धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन देने की तैयारियों में जुटे हैं।
कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को पड़ाेस के स्कूल में समायोजित करने के आए आदेश के बाद शिक्षकों में आक्रोश देखा जा रहा है। शिक्षक संगठन धरना प्रदर्शन की तैयारियों में जुट गए हैं।
निघासन क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय महुआ को रकेहटी विद्यालय में समायोजित कर दिया गया है, लेकिन इससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई है। इंचार्ज अध्यापक रमाशंकर ने बताया कि शिक्षक तो रहते हैं, लेकिन महुआ विद्यालय में नामांकित 16 बच्चों में से कोई भी बच्चा अब तक विद्यालय में नहीं आया है।
अभिभावक संतोष मौर्य, दिनेश मौर्य, दाताराम, धर्मेंद्र और अंश गौतम ने बताया कि रकेहटी विद्यालय महुआ से करीब दो किलोमीटर दूर है और रास्ता निघासन-लखीमपुर हाईवे से होकर गुजरता है। उन्होंने सवाल उठाया कि वे अपने छोटे बच्चों को इतनी दूर और व्यस्त मार्ग से होकर स्कूल कैसे भेजें।
निघासन के प्राथमिक विद्यालय चंदनपुरवा को प्राथमिक विद्यालय तमोलिनपुरवा में समायोजित किया गया है, लेकिन यहां समायोजन का कोई खास असर नहीं है।
पसगवां में शासन के आदेश पर दूसरे विद्यालय में मर्ज किए गए छात्र छात्राओं के अभिभावक सुरक्षा कारणों से उन्हें स्कूल नहीं भेज रहे हैं। उनका शिक्षण कार्य ठप है। प्राथमिक विद्यालय रामापुर में 28 छात्र-छात्राएं हैं। रामापुर को बच्चों और शिक्षक शिक्षिकाओं को संविलियन विद्यालय अल्लीपुर में मर्ज किया गया है।
रामापुर के प्रधान गजेंद्र सिंह, विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष राम प्रताप सिंह, मेवाराम, सुनील कुमार, मुनेश, दृगपाल आदि ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर प्राथमिक विद्यालय रामापुर दुबारा संचालित किए जाने की मांग की है। अभिभावकों का कहना है कि वह इस आदेश के विरुद्ध न्यायालय की शरण लेंगे। प्राथमिक विद्यालय जीरा बोझी के 27 छात्र-छात्राओं को प्राथमिक विद्यालय बसारा में मर्ज किया गया है। शिक्षिका नीलम रानी ने बसारा स्कूल में ज्वाइन कर लिया है, लेकिन विद्यालय के बच्चे नए स्कूल में नहीं जा रहे हैं।
जीरा बोझी निवासी विमलेश, गौरव, सौरभ आदि अभिभावकों का कहना है कि घर से बसारा दूर है। रास्ते में गन्ना की फसल है, बच्चों को जंगली जानवरों से खतरा है।
संजीव त्रिपाठी
संजीव त्रिपाठी