फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शारदा का कहर: ग्रंट 12 गांव में अब तक 123 घर नदी में समाए, सड़क किनारे दिन काट रहे पीड़ित, मदद न मिलने का आरोप

Wed, 24 Sep 2025 08:14 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

निघासन तहसील क्षेत्र के ग्रंट नंबर 12 गांव में शारदा के कटान से मंगलवार शाम को एक पक्का मकान और बुधवार को आठ झोपड़ियां नदी में समा गईं। इस गांव में अब तक 123 मकान नदी में कट गए। बेघर हुए परिवार सड़क किनारे किसी तरह दिन गुजार रहे हैं। 
विज्ञापन
शारदा नदी में गिरा पक्का मकान - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

लखीमपुर खीरी के निघासन तहसील क्षेत्र के ग्रंट नंबर 12 गांव में शारदा नदी का कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। कटान के डर से ग्रंट 12 गांव के ग्रामीण ना घर ही जा पा रहे हैं और ना ही उन्हें कोई सुरक्षित ठिकाना मिल पा रहा है। बुधवार को शारदा की तेज धारा में आठ झोपड़ियां और मंगलवार देर शाम एक पक्का मकान नदी में समा गया।

विज्ञापन


गांव के गरीब परिवारों में तेजाना, प्रकाश, अनिल कुमार, कौशल, रोशन, विनोद, संजय और अच्छेलाल की झोपड़ियां देखते ही देखते नदी की धाराओं में बह गईं। मंगलवार देर शाम रत्तीराम यादव का पक्का मकान भी शारदा में समा गया। ग्रामीणों ने बताया कि अब तक तीन इंटरलॉक सड़कें, दो प्राचीन मंदिर, करीब 123 पक्के मकान और अनगिनत मवेशी नदी की आगोश में समा चुके हैं।

ग्रामीण बोले- नहीं मिल रही कोई मदद 
कटान से बेघर हुए परिवार सड़क किनारे अस्थाई ठिकाने डालकर रातें गुजारने को मजबूर हैं। कई परिवार अपने घरों को शारदा के हवाले कर बेघर होकर दर-दर भटक रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में न जनप्रतिनिधि दिखाई दे रहे हैं और न ही प्रशासन मदद को तैयार है। लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही से कटान पीड़ितों की दशा दिन ब दिन और बदतर होती जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सिंघिया गांव में हो रहा कटान - फोटो : संवाद
सिंघिया में फिर कटान शुरू, छह घर कटे
विकासखंड बिजुआ की ग्राम पंचायत गुजारा के मजरा सिंघिया में शारदा नदी ने फिर से कटान शुरू कर दिया है। मंगलवार से लेकर बुधवार तक छह और मकान नदी में समा गए। अब सिंधिया गांव का नामोनिशान मिटने के कगार पर है। यहां के लक्षिमन, आशादेवी, लालबहादुर, बेलादेवी, रामचंद्र और चंदन के घर कट गए हैं। 

अब गांव 20 घर बचे हैं, यह भी कटान की जद में हैं। लोग इतना डर गये हैं कि बने बनाए घर मकान छोडकर दूसरी जगह पनाह लिए हुए हैं। शुरू से लेकर अब तक लगभग सौ एकड़ कृषि योग्य जमीन फसलों सहित नदी में समा गई है। लोग भूमिहीन हो गए हैं। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो गई है। अभी तक प्रशासन ने उन्हें बसने के लिए कोई जमीन नहीं दी है।

संबंधित वीडियो 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें