पांडुलिपि सौंपते राजपुरोहित के लोग -संवाद
मितौली। मितौलगढ़ के राजा लोने सिंह द्वारा रचित दुर्लभ और ऐतिहासिक पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण की उम्मीदों को पंख लगते दिख रहे हैं। रविवार को पांडुलिपियों का औपचारिक हस्तांतरण विधिवत संपन्न हुआ। यह हस्तांतरण महाराज लोने सिंह के राजपुरोहित वंशज रामशंकर दीक्षित ने किया।
राजा लोने सिंह द्वारा रचित पांडुलिपियों की ऐतिहासिक धरोहर को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के प्रयास शुरू हो गए हैं। गोकर्ण फाउंडेशन की ओर से संचालित गोकर्ण शोध कला व संस्कृति संस्थान के निदेशक विक्रांत सिंह परमार और प्रबंध निदेशक कमल नयन शुक्ला मितौली पहुंचे। विधिवत पत्राचार और स्टांप प्रक्रिया के बाद पांडुलिपियों का हस्तांतरण किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के मुख्य सहयोगी राजकुमार सिंह के अलावा आशू सिंह और राघवेंद्र दीक्षित गवाह के रूप में मौजूद रहे।
इसी क्रम में संस्थान के प्रतिनिधियों ने 19वीं सदी के खैराबाद के नाज़िम और महाराज लोने सिंह के दीवान रहे राजा हकीम मेहंदी अली ख़ान के प्रपौत्र मोहसिन मेहंदी अली ख़ान से भी भेंट की। इस दौरान क्षेत्रीय इतिहास और प्रशासनिक परंपराओं पर चर्चा हुई। साथ ही महाराज लोने सिंह द्वारा दान की गई भूमि से संबंधित पत्र भी प्राप्त हुए, जिन पर राजा लोने सिंह के हस्ताक्षर और मोहर हैं। संस्थान ने पांडुलिपियों के संरक्षण और शोध में उपयोग का भरोसा दिया।