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Lakhimpur Kheri News: बच्चे से दुष्कर्म कर हत्या के दोषी को उम्रकैद की सजा

Mon, 22 Dec 2025 11:03 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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लखीमपुर खीरी। बालक की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में एडीजे गुलाम मुस्तफा ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने दुष्कर्मी हत्यारे को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर एक लाख 35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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विशेष लोक अभियोजक बृजेश पांडे ने बताया कि पलिया थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाला एक सात वर्ष का बालक 31 जनवरी, 2014 को अपने एक दोस्त के साथ गन्ने की पताई लेने खेत में गया था। इसी बीच वहां पर अभियुक्त टापरपुरवा मजरा बड़ा पतवारा निवासी विनोद निषाद आ गया और बुरी नीयत से किशोर को दबोच लिया। उसके साथी को धमकी देकर भगा दिया।
इसके बाद बालक को धमकाते हुए उससे अप्राकृतिक दुष्कर्म किया। घटना के सबूत मिटाने के लिए बालक की गला दबाकर हत्या कर दी। पलिया पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करते हुए गन्ने के खेत से शव बरामद कर पोस्टमाॅर्टम कराया। रिपोर्ट में भी गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने विनोद को गिरफ्तार किया।
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अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले की पैरवी में वादी मुकदमा के साथ ही किशोर के दोस्त, परिजन, रामनरेश, डॉ. राजीव राजपूत, विवेचक जयप्रकाश यादव, उपनिरीक्षक वीर सिंह और अचल दीक्षित चिक लेखक के बयान दर्ज कराए गए थे।
साथ ही फॉरेंसिक रिपोर्ट व नक्शा नजरी बरामदगी प्रपत्र भी अदालत में पेश किए थे। इस बारे में अभियुक्त विनोद की ओर से दी गई एक भी दलील को अभियोजन ने नहीं लगने दिया। सोमवार को एडीजे गुलाम मुस्तफा ने बालक के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में आरोपी विनोद कुमार को दोष सिद्ध करते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है। उस पर 1,35,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

साथी ने हिम्मत दिखाकर गांव वालों को दी थी जानकारी
घटना के बाद बालक का दोस्त पहले तो कई दिन तक खामोश रहा लेकिन उसने हिम्मत दिखाते हुए परिजनों व गांव वालों को विनोद निषाद की पूरी हकीकत बताई। पुलिस ने इसके बाद एक तार से दूसरे तार जोड़ना शुरू किया तो कहानी बिल्कुल साफ हो गई। पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट में भी गला दबाकर हत्या करने की पुष्टि कर दी थी, मगर जब अदालत में सुनवाई शुरू हुई तो दुष्कर्मी हत्यारे की ओर से दया दिखाने की बात कही जाने लगी कि आरोपी नाबालिग है। उसे किशोर घोषित कराने के लिए हर प्रयास किए गए। आरोपी की आयु को लेकर चल रहे विवाद के कारण 10 साल तक उसके खिलाफ आरोप ही तय नहीं किया जा सका। वर्ष 2024 में जब उसकी अपचारी किशोर वाली अर्जी खारिज हुई तो उसके बाद से उसकी उलटी गिनती शुरू हो गई। एक-एक कर नौ गवाह पेश हो गए। रही-सही कसर आठ दस्तावेजों ने पूरी कर दी। इसी का नतीजा है कि सोमवार को एडीजे गुलाम मुस्तफा ने अपने फैसले में ऐसे अपराधियों को समाज के लिए खतरे का संकेत बताया है।
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