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Lakhimpur Kheri News: लखनऊ रूट पर लगी लगाम, दूसरे मार्गों पर डग्गामार बसों को छूट

Sun, 31 Aug 2025 11:09 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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मैगलगंज क्षेत्र में इस तरह संचालित होती है डग्गामार बसें। संवाद
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लखीमपुर खीरी। अनुबंधित बस यूनियन के विरोध के बाद प्रशासन की सख्ती से रविवार को लखनऊ रूट पर तो डग्गामार बसें नजर नहीं आईं, लेकिन जनपद के अन्य मार्गों पर इनकी भरमार रही।
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मैगलगंज, निघासन, पालिया, धौरहरा, अलीगंज से दिल्ली, हरिद्वार, अलीगढ़, मथुरा, जयपुर, हरिणाया, पंजाब के लिए सुबह से देर रात तक डग्गामार बसों का संचालन रविवार को भी होता रहा। जिले में डग्गामार बसों का यह खेल लंबे समय से चलता आ रहा है, लेकिन विभागीय अफसर इन पर अंकुश नहीं लगा रहे हैं।
सबसे ज्यादा पलिया, संपूर्णानगर क्षेत्र से डग्गामार के रूप में स्लीपर बसें दौड़ती हैं। नेपाल के काफी लोग दिल्ली, हरिद्वार आदि बड़े-बड़े शहरों में काम के सिलसिले में आते-जाते हैं। ऐसे में बॉर्डर पर बसों की अवैध तरीके से बुकिंग की जाती है। धौरहरा मोहम्मदी से रोजाना आठ से 10 बसें दिल्ली, हरिद्वार, मथुरा, जयपुर के लिए आती-जाती हैं।
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मितौली से औरंगाबाद से बरबर होकर शाम के समय दिल्ली के लिए स्लीपर बस गुजरती है। वहीं, पसगवां, जंगबहादुरगंज पिहानी होते हुए कई स्लीपर बसें दिल्ली जाती हैं। रूपईडीहा, ढखेरवा चौराहा, तिकुनियां बेलरायां, निघासन होते हुए दर्जनों डग्गामार बसें हरिद्वार, देहरादून, दिल्ली, रोहतक हरियाणा आती-जाती हैं।
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राजस्व को नुकसान, यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में

मैगलगंज। कस्बे से दिल्ली के लिए रोजाना बिना परमिट, बिना टैक्स और बिना वैध कागजात के डग्गामार बसें खुलेआम फर्राटा भरती हैं। प्रधान जी, साहिल, असद, बजरंगी भाईजान जैसे नामों से इन बसों का संचालन होता है। 12 घंटे में करीब 12 बसें रवाना होती हैं। दिल्ली से लौटते वक्त इन बसों में बिना कर चुकाए कपड़े, फर्नीचर व अन्य सामान भरा जाता है, जिससे शासन को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। जानकारों का कहना है कि यह सीधा टैक्स चोरी का मामला है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। डग्गामार चालक-परिचालक यात्रियों से दुर्व्यवहार भी करते हैं। 40 सीटर बसों में 70 से 80 सवारियां बैठाते हैं। संवाद

रोडवेज से कम होता है किराया, सुरक्षा शून्य
अवैध तरीके से संचालित होने वालीं बसों का किराया रोडवेज से काफी कम होता है। लखनऊ मार्ग की बात करें तो रोडवेज का 200 रुपये किराया है, जबकि डग्गामार बसें 150 रुपये में ही वहां तक लिए जाती हैं। यही वजह है कि डग्गामार वाहनों को खूब सवारियां मिलती हैं, लेकिन उनमें सुरक्षा शून्य है। लखनऊ मार्ग पर डग्गामार बसों के संचालन से लखीमपुर डिपो को रोजाना एक से डेढ़ लाख रुपये तक नुकसान हो रहा है।
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कस्बे से दूर भूलनपुर गांव में बैठाते हैं सवारियां
बेहजम। कस्बे से दूर भूलनपुर गांव से रोजाना शाम छह बजे स्लीपर बस दिल्ली के लिए जाती है। इस बस का बेहजम से नीमगांव, सिकंदराबाद, मोहम्मदी होते हुए संचालन होता है। इसी मार्ग से बस लौटती है। कई बसें दिनभर भूलनपुर गांव में सड़क किनारे खड़ी रहती हैं। शाम 6 बजे दिल्ली के लिए बस रवाना होती है। इन बसों से अधिकांश मजदूर वर्ग के लोग ही आते-जाते हैं। संवाद

अजान से दिल्ली जाती हैं डग्गामार बसें
ममरी। हैदराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम अजान से दो डग्गामार बसें रोजाना दिल्ली के लिए संचालित होती हैं, जो बेखौफ होकर सवारियां लाने व ले जाने का काम करती हैं। ये अजान से घरधनिया सिकंदराबाद, अमीरनगर, मोहम्मदी, शाहजहांपुर होते हुए दिल्ली जाती हैं। इस ओर न तो परिवहन विभाग के अफसर ध्यान देते हैं और न ही पुलिस।

डग्गामार बसों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा चुकी है। रोजाना कहीं न कहीं कार्रवाई भी होती है। काफी हद तक लगाम भी लगी है। लखनऊ मार्ग सहित अन्य क्षेत्रों में चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।
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-शांति भूषण पांडेय, एआरटीओ

मैगलगंज क्षेत्र में इस तरह संचालित होती है डग्गामार बसें। संवाद

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