लखीमपुर खीरी। जिन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) को गांव-गांव इलाज की आस जगाने के लिए बनाया गया था, आज वहीं ताले लटक रहे हैं। अंदर सन्नाटा है और बाहर मरीज इंतजार में भटक रहे हैं। कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) की कमी ने इन केंद्रों की धड़कन ही रोक दी है।
जिले में 417 केंद्र बने, लेकिन 94 पर अब भी सीएचओ नहीं हैं। 323 केंद्रों पर ही किसी तरह व्यवस्था चल रही है। कई जगह हालात इतने खराब हैं कि भवन खंडहर बन चुके हैं। डिम्हौरा के चिमनी गांव में 7-8 साल से जर्जर पड़े केंद्र में अब जानवर बांधे जा रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य सेवाएं कहीं और से चलाई जा रही हैं।
संपूर्णानगर में सीएचओ के न होने से एक साल से केंद्र बंद पड़ा है। मोहम्मदी के झखरा में सीएचओ के तबादले के बाद ऑक्ज़िलियरी नर्स मिडवाइफ (एएनएम) ही जिम्मेदारी संभाल रही हैं। निघासन के रकेहटी में सीएचओ के विभागीय कार्य पर जाने से केंद्र बंद मिला। सीएचसी अधीक्षक डॉ. कुलदीप कुमार ने बताया कि यहां तैनात रोली वर्मा विभागीय कार्य के लिए सीएमओ कार्यालय गई हुई हैं।
केशवापुर के पीएचसी सेमरई से जुड़े कुल पांच आयुष्मान जन आरोग्य मंदिर हैं, जिनमें भल्लिया बुजुर्ग, सौठन, रजागंज, रामपुर गोकुल में तैनाती है। तुसौरा में सीएचओ आरती देवी का तबादला होने से यहां सीएचओ की तैनाती नहीं हो सकी। खीरी टाउन के लगुचा में भी एक साल से पद खाली है और परिसर में गंदगी फैली है।
बिजुआ और फूलबेहड़ में हाल और खराब
सीएचसी बिजुआ में 45 में से सिर्फ 11 सीएचओ हैं, जबकि 34 पद खाली पड़े हैं। भानपुर केंद्र में पानी और जरूरी सुविधाएं तक नहीं हैं। फूलबेहड़ क्षेत्र के 47 में से केवल 23 केंद्रों पर ही सीएचओ तैनात हैं, बाकी एएनएम के भरोसे चल रहे हैं। गर्मी में रोजाना 200-250 मरीज पहुंच रहे हैं, लेकिन व्यवस्था कमजोर है।
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कई सीएचओ बेहतर नौकरी मिलने पर त्याग पत्र देकर चले गए हैं। रिक्त पदों की जानकारी शासन को भेज दी गई है। नए सीएचओ मिलने पर तैनाती की जाएगी।
-डॉ. संतोष गुप्ता, सीएमओ
रकेहटी में बंद पड़ा स्वास्थ्य केंद्र। संवाद
रकेहटी में बंद पड़ा स्वास्थ्य केंद्र। संवाद