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कड़ी धूप और तेज हवाओं से जनजीवन हुआ बेहाल

Wed, 06 Apr 2016 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
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माौसम - फोटो : अमर उजाला
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भीषण गर्मी से बिलबिलाया समूचा जिला, बिजली कटौती ने बढ़ाई परेशानियां
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आसमान में उमड़ते-घुमड़ते बादलों से किसानों के चेहरे पर उड़ रहीं हवाइयां
अप्रैल माह में जून जैसी भीषण गर्मी से लोग बिलबिला उठे हैं। कड़ी धूप और गर्म हवाओं के चलते दोपहर में सड़कों पर चलना तक मुश्किल हो रहा है। सुबह से ही कड़ी धूप के कारण मौसम बेहद गर्म हो उठा। तपती धूप के बीच तेज गर्म हवाओं ने जनजीवन बुरी तरह अस्तव्यस्त करके रख दिया। बुधवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
दोपहर बाद वतावरण में धुंध छा गई और आसमान में छिटपुट बादल भी तैरते दिखाई देने लगे। कड़ी धूप के कारण दोपहर होते ही बाजार में सन्नाटा छा गया। धूप से बचाव के लिए लोगों को छाता, चश्मा गमछा आदि का सहारा लेना पड़ा। धूप बढ़ने के साथ कैप, गमछों और धूप के चश्मों तथा ग्लब्स की बिक्री में भी तेजी आ गई है। तेज धूप के साथ लू जैसी तेज हवाओं ने भी लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। भीषण गर्मी और धूप के चलते लोग दोपहर के समय बाहर निकलने में परहेज कर रहे हैं। इस भीषण गर्मी के बीच बार-बार हो रही बिजली कटौती ने लोगों की परेशानियां और ज्यादा बढ़ा दी हैं। 
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आसमान में छाए बादलों को देखकर किसानों की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। इन दिनों कटाई हो रही है। ऐसे में यदि पानी बरसा तो फसल की बर्बादी निश्चित है। मौसम के बदलते रुख को देखकर किसान अपनी फसल जल्दी से जल्दी ठिकाने लगाने की फिराक में है। इससे कंबाइन की मांग एकाएक बढ़ गई है। छोटे किसानों, मजदूरों के जरिए गेहूं की कटाई और मड़ाई का काम तेज कर दिया है। बदहवास किसान आसमान की ओर ताक रहे हैं। 

बिगड़ते मौसम ने बढ़ाई किसानों की चिंता
मूड़ा सवारान। मौसम के बनते बिगड़ते मिजाज को देखते हुए किसान गेहूं की फसल को जल्दी से काटकर अपने घर ले जाने की फिराक में है, जिससे कंबाइन मशीनों की मांग बढ़ गई है।
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छोटे किसान जिन्हें कंबाइन मशीन नहीं मिल रही है वह मजदूरों से गेहूं कटवाकर थ्रेशर से गेहूं की मड़ाई करा रहे हैं। इन दिनों रोज खराब हो रहे मौसम से किसानों को चिंता सता रही है कि यदि ओले गिर गए तो उनकी मेहनत से तैयार खड़ी गेहूं की फसल चौपट हो जाएगी। किसानों के सामने समस्या गेहूं शीघ्र काटकर घर ले जाने की है। समय रहते वे ऐसा नहीं कर पाते तो उन्हें पूरे वर्ष भर पछताना पड़ेगा, लेकिन एक साथ मजदूरों और कंबाइन मशीनों की जरूरत ने इनकी कमी हो गई है। किसान प्रतिदिन सुबह-शाम मजदूरों के घरों के चक्कर काट रहे हैं। इसको देखते हुए गेहूं कटाई करने वाले मजदूरों ने अपनी मजदूरी भी बढ़ा दी है।
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