बलिया थाना क्षेत्र के एक गांव में 30/31 अगस्त 2013 की रात हुई थी घटना
लखीमपुर खीरी। आठ वर्षीय बालिका की दुष्कर्म के बाद हत्या करने के मामले में एडीजे रामलाल ने हत्यारे दुष्कर्मी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही जुर्माना लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रमेश चंद्र मिश्रा ने बताया बलिया थाना क्षेत्र के एक गांव में 30/31 अगस्त 2013 की रात को एक ग्रामीण अपने मकान से लगे छप्पर के नीचे अपनी पत्नी और आठ वर्षीय बालिका के साथ सो रहा था। घर के पास ही अतरिया गांव का रहने वाला मनोज बाबा पुत्र मुल्लू सो रहा था। रात करीब दो बजे जब ग्रामीण की नींद खुली तो अपनी आठ वर्ष की पुत्री को गायब पाया। माता-पिता ने ग्रामीणों की मदद से बालिका की खोजबीन शुरू की तो पास ही रहने वाला मनोज भी बिस्तर से गायब था। बालिका की खोजबीन के दौरान ही गांव के बहादुर के गन्ने के खेत में चकरोड के किनारे बालिका का शव नग्न अवस्था में पड़ा मिला।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बालिका की गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई। यह भी सामने आया की बालिका से जोर जबरदस्ती की गई थी। अदालती सुनवाई के दौरान एडीजीसी रमेश चंद्र मिश्र ने देवेंद्र सिंह, अतीउल्ला खान, गंगाराम, विवेचक रामकुमार यादव, डॉ. प्रवीण कुमार, मीरा वर्मा की गवाही दर्ज कराई और बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। अदालती सुनवाई के बाद न्यायाधीश रामलाल ने दोषी मनोज बाबा को उम्र कैद की सजा सुनाई है साथ ही उस पर बीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
पीड़िता के परिजन को मिलेगा मुआवजा
अदालत में फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश रामलाल ने हत्यारोपी पर लगाए गए जुर्माने की रकम 20000 रुपये बतौर मुआवजा पीड़िता के परिजन को उपलब्ध कराने का आदेश पारित किया। वहीं इस रकम को भी नाकाफी मानते हुए अदालत ने राज्य सरकार को आदेशित किया है कि वह विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत समुचित मुआवजे की रकम अलग से दिवंगत बालिका के परिजन को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।