लखीमपुर खीरी। संपत्ति के लालच में चचेरी बहन को मौत के घाट उतारने के मामले में एडीजे देवेंद्र नाथ सिंह ने हत्या के दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने हत्यारोपी पर 26 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी संजय सिंह ने बताया ईसानगर थाना क्षेत्र के ग्राम लाखुन निवासी गंगाधर की लड़की सीता की शादी धौरहरा थाना क्षेत्र के ग्राम महादेव मजरा अमेठी निवासी कमलाकांत के साथ हुई थी। आरोप है कि गंगाधर के कोई लड़का न होने के कारण उनकी मौत के बाद उसकी जमीन पर चचेरे भाई निशा मिश्र अपने साथियों के साथ खेती बाडी करते थे।
निशा मिश्र और उसके साथी जमीन नाम कराने के लिए गंगाधर की पत्नी माहेश्वरी देवी और पुत्री सीता पर दबाव बनाते थे। आरोप है कि 20 और 21 अगस्त 2013 की रात जब सीता अपने पति कमलाकांत के साथ अपने मायके ग्राम लाखुन में सो रही थी, तभी लाखुन निवासी निशा मिश्र अपने भाई लालू मिश्र वहां आकर गाली गलाैज करने लगे। विरोध करने पर तमंचे से चचेरी बहन सीता को गोली मार दी। चाची माहेश्वरी देवी ने बचाने की कोशिश की, तो उसे भी गोली मारकर घायल कर दिया था।
इस दोहरे गोली कांड में सीता ने दम तोड़ दिया था। कमलाकांत ने अपनी पत्नी सीता देवी की हत्या और सास माहेश्वरी देवी पर जानलेवा हमले की नामजद रिपोर्ट निशा मिश्र और उसके भाई लालू मिश्र के खिलाफ दर्ज कराई थी। अदालती सुनवाई के दौरान डा.वीके वर्मा, इएमओ अखिलेश मिश्र, कमलाकांत, माहेश्वरी देवी एसआई आगा चंद्र रीडर, एसआई शिवकुमार सिंह यादव, निरीक्षक राजकुमार सिंह, डा.अनिल वर्मा और प्रताप नरायन सिंह की गवाही दर्ज कराई गई।
बचाव पक्ष से लालू मिश्र की ओर से खुद को बेगुनाह बताते हुए कई दलीलें दी गईं। शुक्रवार को अदालत ने फैसला सुनाते हुए निशा मिश्र को हत्या और जानलेवा हमले के मामले में दोषसिद्ध पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। लालू मिश्र के खिलाफ पर्याप्त सबूत न मिलने पर उसे मामले से बरी किया गया है।