धौरहरा। सिसैया खुर्द गांव में सड़क और विकास कार्यों को लेकर शुरू हुआ विरोध अब सियासी रंग लेने लगा है। ग्रामीणों के प्रदर्शन के बाद मारपीट और पुलिस कार्रवाई के आरोपों ने मामले को और तूल दे दिया। इसके बाद सपा, कांग्रेस, भाजपा व बसपा समेत विभिन्न राजनीतिक दलों और लोधी समाज के नेताओं का गांव पहुंचना शुरू हो गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नेताओं की यह सक्रियता सिर्फ ग्रामीणों की आवाज उठाने तक सीमित है या इसके पीछे आगामी चुनाव को देखते हुए सियासी जमीन तैयार करने की कोशिश भी है।
सिसैया खुर्द में ग्रामीणों ने 12 सितंबर को सड़क और जलभराव की समस्या को लेकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान ‘काम नहीं तो वोट नहीं’ के नारे लगाए गए और विधायक व ग्राम प्रधान के खिलाफ भी विरोध जताया गया था। इसके दो दिन बाद रात में ग्रामीणों के साथ मारपीट और पुलिस की कार्रवाई के आरोप लगे। मामले की जांच के बाद एसपी ने धौरहरा कोतवाली के पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। साथ ही शुक्रवार को धौरहरा कोतवाल दिनेश कुमार को भी लाइन का रास्ता दिखाया गया।
घटना के बाद राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई। सपा नेताओं ने ग्रामीणों से मुलाकात की तो कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल भी गांव पहुंचा। वहीं लोधी राजपूत समाज के प्रतिनिधिमंडल ने भी पीड़ित ग्रामीणों से मुलाकात कर जांच की मांग उठाई। प्रतिनिधिमंडल में कई विधायक भी शामिल रहे। भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता ने भी ग्रामीणों के साथ एसपी से मुलाकात कर मामले में कार्रवाई की मांग की।
वहीं, धौरहरा विधायक विनोद शंकर अवस्थी ने ग्रामीणों को पिटवाने के आरोपों को साजिश बताया और खुद को ग्रामीणों के साथ बताया है। फिलहाल गांव में नेताओं की बढ़ती आवाजाही ने इस सवाल को जरूर चर्चा में ला दिया है कि सिसैया खुर्द में मुद्दा ग्रामीणों का है या इसके बहाने सियासी जमीन तैयार करने की कवायद भी शुरू हो गई है।